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RBI ने YES BANK पर कसा शिकंजा, 1 माह में 50 हजार निकालने के आदेश के बाद बैंक और ATM के बाहर उमड़े ग्राहक

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ने आर्थिक संकट में फंसे यस बैंक के ग्राहकों के लिए 50 हजार रुपए निकासी की सीमा तय कर दी है। यह निकासी की सीमा 3 अप्रैल, 2020 तक लागू रहेगी।इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने यस बैंक के निदेशक मंडल के अधिकारों पर रोक लगाते हुए एक महीने के लिए एसबीआई के पूर्व डीएमडी और सीएफओ प्रशांत कुमार की प्रशासक के रूप में नियुक्ति कर दिया है। इस आदेश के बाद यस बैंक के एटीएम के बाहर ग्राहकों की पैसे निकालने के लिए लम्बी-लम्बी लाइनें लग गई है। आज सुबह बैंक खुलने के बाद ग्राहक बैंक की शाखाओं पर जमा हो गए हैं।

नकदी पर सीमा क्यों लगाई यहां देखें...
-यस बैंक ने जो कर्ज बांटा था उसमें अधिकांश डूब गए हैं, बैंक इस समस्या से जूझ रहा है। बैंक चाहता है कि नई पूंजी जुटाई जाए लेकिन इस काम में उसे काफी समस्या आ रही है। इसी वजह से बैंक ने दिसंबर, 2019 की तिमाही नतीजे भी घोषित नहीं किए हैं। एनपीए की वजह से बैंक की सुरक्षित पूंजी कम हो गई है।

एक से अधिक खाते होने पर भी निकाल सकेंगे पचास हजार रुपए...

आरबीआई ने बताया कि यस बैंक लगातार एनपीए की समस्या से जूझ रहा है, इसके चलते यह निर्णय लेना पड़ा है। आरबीआई द्वारा जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, यस बैंक में बचत, चालू या किसी अन्य जमा खाते से एक महीने के दौरान 50 हजार रुपए से ज्यादा धनराशि नहीं निकाल सकेंगे।

इसके अलावा यदि किसी के बैंक में एक से ज्यादा खाते हैं तो भी 50 हजार से ज्यादा धनराशि नहीं निकाली जा सकेगी। दूसरी ओर एसबीआई बोर्ड ने येस बैंक में निवेश के लिए ‘सैद्धांतिक’ स्वीकृति प्रदान कर दी है। एक्सचेंज ने यस बैंक से पांच मार्च 2020 को स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें ब्लूमबर्ग में पांच मार्च को छपी खबर के हवाले से कहा गया है कि सरकार ने एसबीआई की यस बैंक की हिस्सेदारी खरीदने की योजना को मंजूरी दी है। बीएसई ने कहा कि जवाब की प्रतीक्षा है।"

दरअसल ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया था कि भारतीय स्टेट बैंक को इस कंसोर्शियम के दूसरे सदस्यों को भी चुनने का अधिकार दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार यस बैंक को डूबने से बचाने के लिए एसबीआई की योजना मंजूर करने के साथ एसबीआई को यस बैंक में हिस्सा खरीदने के लिए कंसोर्शियम बनाने को कह सकती है।


 साभार-khaskhabar.com

 

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