देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreसौ साल पहले की बात है। प्रसिध्द क्रांतिकारी एवं लेखक लाला हरिदयाल ने अपने एक लेख में लिखा है कि राज्य में व्यवस्था चाहे कोई हो , व्यक्ति द्वारा व्यक्ति की सेवा की जरूरत हमेशा रहेगी।
आज कोरोना वायरस के हमले में हमारे देश में हर कोई लस्त-पस्त और बेबस दिखाई दे रहा है ,तब लाला हरदयाल की उक्त उक्ति का स्मरण बरबस हो रहा है और मैं अपने शहर के दानवीर , संवेदनशील समाजसेवियों की फेहरिस्त बनाने में जुट गया हूँ। बेशक , मेरे शहर के अनेक छोटे -बड़े धनिकों , वेतन और पेंशन धारकों ने पी एम् ,सीएम फंड में कुछ रकमें दी है। फिर भी अपने आपस पास इंसान द्वारा इंसान की सेवा की कमी है। लेकिन भविष्य में इतिहास में जब भी कोविड-१९ के शहर दर शहर के किस्सों को दर्ज किया जायेगा तब सेठ राम किशोर अग्रवाल द्वारा दी गई सेवाओं का उल्लेख अवश्य होगा।
श्री राम किशोर अग्रवाल के नाम से और शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में किये गए उनके काम से सभी लोग वाकिफ हैं लेकिन कम लोग जानते हैं कि एक साधारण परिवार में जन्मे रामकिशोर अग्रवाल ने समाज में कुछ कर गुजरने की हसरत के साथ सामजिक क्षेत्र में कदम रखा था ।
सामजिक सेवा के जुनून के कारण ही विगत ढाई दशकों में उनके द्वारा मथुरा -नौयडा में स्थापित स्कूल ,कालेज और अस्पताल की फेहरिस्त लम्बी हो चुकी है। राम किशोर जी द्वारा अपने निजी जीवन में अनेक जान पहचान और अनजान लोगों की निस्वार्थ मदद की है।
मदद के इन किस्सों से एक पुस्तक का स्वरूप बन सकता है। रामकिशोर जी की दरियादिली का एक किस्सा बेहद रोचक है।
मथुरा में जीे एल ए इंजीनियरिंग की शुरूआत हुई थी , पहला सत्र था। अखबार में प्रवेश के विज्ञापन को पढ़ कर कलकत्ता से एक नौजवान इस नए कालेज में आया और रामकिशोर जी से बोला ---'मेरे पास फीस नहीं लेकिन इंजीनियरिंग में दाखिला चाहिए , एक साल बाद ट्यूशन करूंगा और आपकी फीस चुका दूँगा। '' मैं पास में बैठा था ,सोच रहा था कि यह प्रस्ताव मालिक को अच्छा नहीं लगेगा। तभी राम किशोर जी ने मंद मंद मुस्कराते हुए पहले मुझे देखा और फिर नौजवान को और तत्काल बाबू को बुलाकर अनजान नौजवान को बिना फीस के प्रवेश दे दिया।
इस नौजवान का नाम जटानिल बनर्जी था। जटानिल आज बॉलीबुड में स्थापित संगीतकार है , कई फिल्मों में ए आर रहमान के साथ काम किया है। दरअसल , जटानिल को गणित में महारत हासिल थी और संगीत में उसके प्राण बसते थे । मथुरा के कृष्णा नगर इलाके में किराये पर कमरा लेकर जटानिल ने ट्यूशन किये , अपना पेट भरा और इंजीनियरिंग की । एक सिंस्थेसाइजर ख़रीदा ,प्रैक्ट्स की , अनेक गानों की ध्वनि बनाई और लंदन स्कूल म्यूजिक में दाखिले के सपने देखे। १६ लाख की फीस जुटाई जिसमें ५ लाख रु राम किशोर जी ने दिए।
दाखिला लिया , पास हुआ और फिर कई साल हॉलीबुड में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस किस्से का मजेदार पहलू यह है कि रामकिशोर जी 'नेकी कर दरिया में डाल' की कहावत को चरितार्थ करते हुए जटानिल को भूल गए लेकिन मैं जटानिल को दोस्त बना बैठा। जटानिल आज भी मेरे संपर्क में और टेलीफोन पर राम किशोर जी की उदारता का स्मरण कर अभिभूति हो जाता है। जटानिल की दुनिया आज बहुत बड़ी है लेकिन उसकी दुनिया में राम किशोर कोई नहीं।
राम किशोर जी की उदारता को सोचकर ही जिला प्रशासन ने उनके 'के डी मेडिकल कालेज ' को कोविड के मरीजों के लिए चुना। उन्होंने सहर्ष स्वीकृति देते कहा --- ''मुझे ख़ुशी है , आखिर अस्पताल होते ही इसीलिए है। '' राम किशोर जी ने ५० लाख की राशि भी प्रधान मंत्री कोष में दे दी।
आज इस सुविधा सम्पन्न और शानदार बिल्डिंग वाले अस्पताल में एक दर्जन से ज्यादा कोविड मरीज भर्ती है , इनमें मथुरा के नामी वकील महेश्वर नाथ चतुर्वेदी भी है। महेश्वर दो दिन पूर्व जब कोरोना ग्रस्त होने पर दाखिल हुए तो बेहद घबड़ा रहे थे लेकिन कल रामकिशोर जी का उनके पास फोन आया और हर सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया तो महेश्वर नाथ का मनोबल आसमान छू गया। मैं जानता हूँ इसी मनोबल से महेश्वर कोरोना को जल्द ही परास्त कर देंगे।
जब महेश्वर के मित्रों को मालूम हुआ कि इस वक्त राम किशोर जी का पुत्र भी इस अस्पताल में भर्ती है तो सभी रामकिशोर जी के साहस और उदारता के कायल हुए बिना नहीं रहे। जिसके घर में कोविड का मरीज हो और वह दूसरे की चिंता करे , यह चौकाने वाली खबर है ही।













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