BREAKING NEWS

दिल्ली : राहुल गांधी ने शुरू की ‘सत्याग्रह’ पहल, लोगों से मांगी अन्याय के खिलाफ संघर्ष की कहानी || दिल्ली : नशीले पदार्थों की तस्करी के सरगना नवप्रीत सिंह का प्रत्यर्पण, केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया- 'मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि' || पटना : बाढ़ प्रभावित इलाकों में वायुसेना का राहत अभियान, हेलीकॉप्टरों से 10 टन सामग्री पहुंचाई गई || जोधपुर : केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को जन्मदिन पर बधाईयों का तांता, पीएम मोदी समेत नेताओं ने दी शुभकामनाएं || उत्तर प्रदेश : हापुड़ में मुठभेड़ के बाद पांच अपराधी गिरफ्तार, पुलिस ने 55 लाख के सामान से भरे कैंटर लूट की घटना को सुलझाया

पंचायत चुनावः बेहद महत्वपूर्ण है ग्राम पंचायत सदस्य का पद

मथुरा। ग्राम पंचायत सदस्य को भी लोकसेवक का दर्जा प्राप्त होता है। ग्राम पंचायत सदस्य बन कर जनता की सेवा का अवसर तलाशा जा सकता है। उत्तर प्रदेश पंचायतीराज नियमावली का नियम-72 के तहत् पंचायत सदस्य चाहे तो पंचायत के किसी भी कार्य, दस्तावेज, लेख, रजिस्टर, प्रस्ताव तथा संस्थागत मसले का निरीक्षण कर सकता है। पंचायतीराज अधिनियम की धारा-26, ग्राम पंचायत सदस्य को पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पेश करने का अधिकार देती है। सदस्य चाहे तो प्रधान व संबंधित प्रशासन से प्रश्न पूछ सकता है। धारा-28, पंचायत सदस्य को भारतीय दण्ड संहिता-21 के अंतर्गत ’लोकसेवक’ का दर्जा देती है। यह दर्जा, उन सभी अधिकार प्राप्त पदाधिकारियों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों को प्राप्त होता है, जो शासन संचालन में शामिल होते हैं। क्या यह कम महत्वपूर्ण दर्जा है ? त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मंे ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव सबसे छोटा होता है। छोटा हैसियत में नहीं बल्कि मतदाताओं की संख्या के आधार पर है। जनपद में 6560 ग्राम पंचायत सदस्य वर्ष 2021 के ग्राम पंचायत चुनाव में चुने जाने हैं। जबकि 504 ग्राम पंचायत, 813 क्षेत्र पंचायत सदस्य व 33 जिला पंचायत सदस्यों को मतदाता चुनेंगे। पंचायती चुनाव में उम्मीदवार ग्राम प्रधान तथा क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य के पदों पर चुने जाने के लिए जी-तोड़ कोशिश करते हैं। जबकि 2015 के उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में वार्ड मेम्बर की 1 लाख 33 हजार, 138 सीटों पर किसी ने पर्चा ही नहीं भरा था। तीन लाख, एक हजार, 832 सीटें ऐसी थीं, जिन पर सिर्फ एक उम्मीदवार ने पर्चा भरा था। दोनांे को मिलाकर कुल संख्या, कुल वार्ड मेम्बरों का 60 प्रतिशत होती है। यह प्रमाण है कि वार्ड मेम्बरी का किसी को आकर्षण नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि पंचायतीराज अधिनियम जो भी शक्तियां, अधिकार अथवा कर्तव्य प्रदान करते हैं, वे पंचायत नाम की संस्था के होते हैं न कि किसी एक व्यक्ति अथवा पद के। इस नाते, पंचायत को प्राप्त सभी कर्तव्य व अधिकारों में पंचायत सदस्य का भी साझा होता है। वार्ड मेम्बर, कोई महत्वहीन पद नहीं है। पंचायतों के संविधान के अनुच्छेद 243 (ग) 2, सदस्यों को चुने बगैर तीनों स्तर की पंचायतों के गठन की इजाजत नहीं देता।
डीपीआरओ डा. प्रीतम सिंह के मुताबिक 73वां संविधान संशोधन, वार्ड मेम्बरों को पांच महत्वपूर्ण भूमिकाएं प्रदान करता है। ग्राम पंचायत सदस्य, वार्ड सदस्यध्वार्ड अध्यक्ष, न्याय पंचायत सदस्य, न्याय पंचायत प्रमुख, स्थाई समिति सदस्य, सभापति तथा ग्राम पंचायत विकास योजना का मुख्य सहयोगी की भूमिका है।

ग्राम सभा के कार्य


-ग्राम सभा गांव के हित में योजना बनाती है, और उन्हें लागू करती है।
-ग्राम सभा ग्राम पंचायत का बजट पारित कर एकत्रण के नियम बनाती है।
-सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करती है।
-लाभार्थियों का चयन करती है।
-जनसुनवाई के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाती है।
-समाज के सभी वर्गों मे मेल-जोल व एकता बढ़ाने का काम करती है।
-प्रौढ़ शिक्षा का कार्यक्रम की व्यवस्था करती है।
-अन्य मामले जो पहले से तय हों (जैसे परिवार कल्याण, पर्यावरण सुधार,टीकाकरण)

 

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको  ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

Read More