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प्रवासियों को ब्रज में महसूस होती है कृष्ण की कृपा

एक प्रवासी के मुख से सुना की यहाँ साक्षात कृष्ण विराजते है हम पंजाब से होते हुए हरियाणा और उत्तर प्रदेश होते हुए आएं ब्रज में जैसे ही प्रवेश किया खाना, पीना सबके लिए लोग पूछने आये तब लगा की हम अपने घर पहुँच गए... ..मेने पुरानी स्टोरी में इसका जिक्र किया था...खेर रामसिंह जिला बलिया के रहने वाले अपने परिवार के साथ चार दिनों के सफर के बाद मथुरा पहुंचे है....बात करें यहाँ अध्यात्म कि तो जब नारद मुनि भ्रमण करके निकल रहें थे तो देखा वृन्दावन के यमुना किनारे एक देवी रो रही थी... वो उनसे मिलने जब पहुंचे तो पूछा है देवी आप कौन है और ये दो वृद्ध पुरुष पड़े है ये कौन है..उन्होंने बताया की...है नारद...में भक्ति हु और ये दोनों मेरे पुत्र ज्ञान और वैराग है.....मुझे तो इस ब्रज में मेरा वास्तविक स्वरूप मिल गया....पर ये दोनों इस अवस्था में है...नारद ने भक्ति माता को प्रणाम किया....ये कलयुग की आरम्भिक बात है जो भागवत पुराण में कही गयी है ये कथा सभी ने अधिकतर सुनी होगी...मेने इसका जिक्र इस लिए किया क्योकि इस ब्रज में आज भी कण-कण में श्रीराधाकृष्ण बसे हुए है... ये ही गौलोक धाम है...भगवान कृष्ण का परमधाम जहाँ स्वयं गिरिराज जी में गिरधर का वास है.... इस धाम में कोई भूखा नहीं रह सकता...इसलिए प्रवासी मजदूर भी जब इस धाम में प्रवेश करते है तो खाना यहाँ तक की उनकी सारी व्यवस्था भी पूर्ण हो जाती है.... ये हमे रामसिंह ने बताया की जैसे ही हम ब्रज में प्रवेश किया महसूस हुआ मिलो का सफर थकान सब खत्म हो गयी... जैसे कन्हैया का आशीर्वाद मिल गया हो... हमने पूछा आप अपने घरों को क्यों छोड़ते हो बोला वहां कुछ नहीं....न कंपनी है....न कोई रोजगार इसलिए हमें वहां से आना पड़ता है...बहार निकलना पड़ता है...आखिर ये सब है क्या..उनके साथ के साथी पूरन ने बताया की अगर खाने मिल रहा होता तो आतें क्यों....जब कहा की सरकार बसें चला रही है तो आप ऐसे क्यों निकल रहें है तो कहा हमे शौक नहीं है पैदल चलने का पिछले तीस दिन से आजकल हो रही थी...जब खाने के लिए पैसे खत्म हो गए तो चल दिए....किराये के लिए पैसे नहीं बचे इसलिए पैदल निकल दिए.......कोशिश करता हु....हर बार आप सब पे लोगों की हकीकत पहुंचे...एक मन में वेदना है की जो ईश्वर के बाद इस धरा पे स्थान रखता है... राजा....क्या कर रहा है इसलिए राजा को सोचना चाहिए की इन सब का क्या होगा क्योकि ये भी इंसान है हाड़ मांस का शरीर है इनका भी ये तो एक बहुत बड़े श्राप से गुजर रहें जिसे गरीबी कहते है... अगर कुछ करना है तो इनके लिए करो.... फिर विराम देता हु अपनी बात को आगे फिर एक नयी हमारी बात के साथ...!

नारद संवाद

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