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MATHURA : बरसाना, नंदगांव होते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आज बरसेंगे होली के रंग

मथुरा। बरसाना के बाद गुरूवार को नंदगांव में लठामार होली हुई। रंगभरनी एकादशी यानी शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर होली खेली जाएगी। वृंदावन में भी रंग बरसेंगे।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर रंगभरनी एकाशी को होली खेली जाएगी। सुबह से ही रंगमंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और शाम को होगी उडते हुए रंग गुलाल के बीच लठामार होली। श्रीकृष्ण जन्मस्थान  श्रीकृष्ण जन्मस्थान होने वाली लठामार होली करीब चार दशक पूर्व प्रारंभ हुई थी। तब यह होली दो दिन की होती थी। पहले दिन ध्रुव व भक्त प्रह्लाद की लीला का मंचन होता था और दूसरे दिन होली के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे। करीब सात वर्ष बाद यह आयोजन एक दिन का हो गया। अब इस लठामार होली की अपनी अलग पहचान है।
वृंदावन की कुंज गलियों में वैसे तो होली का आगाज हो चुका है, लेकिन बांकेबिहारी मंदिर में रंगभरनी एकादशी पर इसकी विधिवत शुरुआत होती है। रंगभरनी एकादशी छह मार्च को है। इस दिन से ठाकुर बांके बिहारी मंदिर सहित सभी मंदिर में भक्तों द्वारा जमकर गुलाल उड़ाया जाएगा।
शृंगार आरती के बाद ठाकुर बांकेबिहारी के गालों पर केसर की कीच लगाई जाएगी। ठाकुरजी की ओर से मंदिर के सेवायत रंग-गुलाल उड़ाएंगे। इसके लिए मंदिर प्रशासन सहित पुलिस ने भी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
वृंदावन में माना जाता है कि प्रिया (राधारानी) प्रियतम (भगवान श्रीकृष्ण) ने प्रेम भरी लीलाएं की थीं। उन्हीं लीलाओं में से एक लीला है होली। रंगभरनी एकादशी से प्रिया-प्रियतम होली की लीलाओं में मग्न हो जाते हैं।
प्रेम के जिस रस में डूबे रहते हैं, भक्तगण उसी प्रेम रस का पान करते हैं। इस दिन ठाकुर बांकेबिहारी जी महाराज गर्भगृह से निकलकर बाहर आ जाते हैं और लगातार पांच दिन तक बाहर ही रहकर रसिकों के साथ होली खेलते हैं।
जय श्रीकृष्ण लठामार होली समित के अध्यक्ष किशोर भरतिया बताते हैं कि 1978 में उनके साथ बाबूलाल बजाज, जय किशोर बजाज, प्रेमचंद सुनार, बुलाकी दास वर्मा, राधारमन ब्रह्मचारी, बांकेलाल कनौडिया आदि श्रीकृष्ण जन्मस्थान के केशवदेव मंदिर में दर्शन करने आते थे। उस समय रंगभरनी एकादशी के दिन जन्मस्थान पर होली के आयोजन करने की भूमिका तैयार हुई। तब जतीपुरा से छड़ीमार हुरंगा खेलने वाले महिला-पुरुषों तथा कुछ स्कूलों के बच्चों लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम व ध्रुव-प्रह्लाद की लीला का आयोजन शुरू किया गया। इस पहले आयोजन में जयदयाल डालमियां की धर्मपत्नी ने 500 रुपये व जन्मस्थान के तत्कालीन मैनेजर मनोहरलाल शर्मा ने 250 रुपये का सहयोग दिया। इसके कुछ वर्ष बाद जाव-बठैन के कलाकारों को लठामार होली के लिए बुलाया गया, जिसका बरसाना के लोगों ने विरोध कर दिया। मामला तत्कालीन डीएम तक पहुंचा। परंतु, लठामार होली का यह आयोजन नहीं रुका। परंतु, जाव-बठैन के कलाकारों के न आने की वजह से मलपुरा के ग्वालिन-ग्वालों को बुलाया जाने लगा। परंतु, ये भी कुछ वर्ष ही आए।
मलपुरा के ग्वाल-ग्वालिनों की मनाही के बाद यहां ग्राम रावल के हुरियारे व हुरियारिनों को लठामार होली के आयोजन के लिए बुलाया जाने लगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने इस आयोजन में अपनी विशेष रूचि दिखाते हुए इसे आज इस ऊंचाई तक पहुंचा दिया है।
अब यहां ब्रज ही नहीं राजस्थान, हरियाणा व दिल्ली के कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं। होली के इस आयोजन के लिए बड़े पैमाने पर प्रबंध किए जाने लगे हैं। वर्तमान में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के साथ जयश्री कृष्ण लठामार होली समिति के अध्यक्ष किशोर भरतिया, महामंत्री नंदकिशोर स्टील वाले, कोषाध्यक्ष विजय बंसल, महेश चंद्र प्रेस वाले, सुरेश चंद अग्रवाल स्वीटी, अनिल भाई ड्रेस वाले, अशोक बेरीवाल आदि होली की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

 

नारद संवाद

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