BREAKING NEWS

मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-4036474

MATHURA : 250 बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं भारत

मथुरा। सौंख अड्डा एलआईसीश् दफ्तर में तैनात 28 साल के विकास अधिकारी भारत अग्रवाल की दुनिया वह नहीं जो अन्य नौजवानों की देखी जा सकती है। दफ्तर में मची अफरा तफरी के बीच भाग दौड करते लोगों को नहीं मालूम कि उनके साथी भारत ने जिंदगी जीने का रास्ता खुद ब खुद और वह भी निराले अंदाज में बना लिया है। अभी भारत ने 30 बसंत भी नहीं देखे हैं कि एक बेहद मुश्किल सवाल कि हम इस दुनिया में क्यों आये हैं का उत्तर भारत ने तलाश लिया है। भारत लीक से हट कर सांसे ले रहा है और उसकी खुशी का इजहार उसके चेहरे से होता है।
भारत डिबाई (बुलंदशहर) शहर के रहने वाले हैं और एलआईसी में नौकरी करने मथुरा में आये हैं। भारत को गरीब बच्चों को पढ़ाने में अपार सुख मिलता है। उसके जीवन की हर शाम गरीब बच्चों को गणित के सवाल हल कराने में गुजरती है। इन गरीब बच्चों में वे बच्चे भी शामिल हैं जो सड़कों और गली मौहल्लों में लगे कूड़े के ढेरों में से अपने काम की चीज तलाशते देखे जा सकते हैं। होटलों और ढाबों पर बर्तन साफ करते या भीख मांगते बच्चे तो हैं ही, भारत ने अपने मकसद को विस्तार देते हुए अपने काम में अपनी पत्नी शिखा और उसके भाई पीयूष को भी जोड़ लिया है। 
मथुरा के ट्रांसपोर्ट नगर, सदर बाजार और भूतेश्वर चैराहे के इलाकों में भारत ने तीन अलग अलग सेंटर खोलने में कामयाबी हासिल कर ली है और वह भी बिना किसी की आर्थिक मदद के । इन तीनों स्थानों पर 8 से 16 साल तक के कुल 250 बच्चे हैं जो भारत के अच्छे दोस्त बन गए हैं। 
भारत ने अब स्ट्रेंजर फ्रेंड्स हैल्पिंग हैण्ड् नामक संस्था का गठन किया है और इसके तहत शिक्षा के साथ समाजसेवा के कई अन्य आयाम भी शामिल किये हैं। मसलन रक्त दान के लिए नौजवानों को प्रेरित करना, महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना आदि। 
जबह उनसे पूछा गया कि सारी दुनिया मंदिर मस्जिद के लफड़े में या 370 के बबाल में या अपने करिअर के उत्थान में या नेता बनने की जुगाड़ में दर दर भटक रही है और तुम लीक से हट कर सांसे क्यों ले रहे हो?  इस पर भारत बड़े आत्मविश्वास से बोले मुझे अभावों में पलने वाले मासूमों से बचपन से ही लगाव है। मैं अपने शहर में जब कभी नट का तमाशा करते, रस्सी पर चलते छोटे बच्चों को देखता था तो मेरे मन में आता था कि यदि पढ़ लिख जाएं तो ये कच्ची उम्र में खतरों से खेलने से बच जायेंगे, तभी से फैसला किया कि जिस शहर में रहूंगा, इन बच्चों की जिंदगी का एक हिस्सा बन कर रहूंगा। आश्यर्य की बात है कि भारत को आधुनिक राजनीती में कोई दिलचस्पी नहीं है, उसकी दिलचस्पी तो एक ऐसे काम में है जिसकी जरूरत इस धरती पर सदैव से बनी हुई है और सदैव बनी रहेगी, चाहे कोई भी राजनैतिक व्यवस्था क्यों न हो।


 

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More