देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। पीपली लाइव फिल्म का गाना सईयां तो खूब ही कमात हंै, महंगाई डायल खाए जात है इन दिनांे सब्जी मंडी में सटीक बैठ रही हैं। सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। करेला तो करेला भिंडी भी कसैली लग रही है। हालत यह है कि कुछ लोगांे के लिए सब्जी मंडी घूमने फिरने की जगह हो गई है। लोग थैला लेकर मंडी पहुंचते जरूर हैं लेकिन घूम फिर कर बिना कुछ लिये वापस लौट आते हैं। अभी तक कुछ नहीं खरीदने वाला भी आलू लेकर तो लौटता ही था लेकिन अब यह भी बूते से बाहर की बात होती जा रही है। ऐसी कोई सब्जी नहीं जो 40 से नीचे मिल रही हो। कोरोना काल में सब्जी के दाम कुछ महीने कम रहे थे। लोगों को लगा था महंगाई नियंत्रित हो रही है। जैसे जैसे समय निकला तस्वीर उल्टी होने लगी। जिन सब्जियों को कोरोना काल मंे लोग पूछ नहीं रहे थे अब उन्हें खरीदने की हैसियत ही खो बैठे हैं। इसके बाद हुई बरसात और कुछ दूसरे कारणों से सबिज्यों कं दाम आसमान छूने लगे हैं। आढतियों का कहना है कि मंडी में भी सब्जियां कम आ रही है। कीमत लगातार बढ रही है। होलीगेट से डीग गेट तक लगने वाले सब्जी के फडों पर बैठे दुकानदार भी महंगाई का रोना रो रहे हैं। दुकानदारों का कहना था कि लोगों को लगता है कि महंगी सब्जी बेचकर हम ज्यादा कमाई कर रहे हैं, ऐसा है नहीं। हम उतना भी नहीं कमा पा रहे जिनते सामान्य दिनों में कमा लेते थे। एक तरह से कमाई आधी रह गई है। ग्राहक आ नहीं रहे, बिक्री हो नहीं रही, जो लोग आते हैं उनमंे से भी बहुत लोग बिना कुछ खरीदे ही वापस चले जाते हैं। सब्जियां मंडी में ही महंगी आ रही हैं। आवाक कम है। मार्जिन वही एक से दो रूपये किलो का है। जब बिक्री आधी भी नहीं हो रही तो आमद नी कैसे होगी। ग्राहक सविता देवी का कहना था कि अब तो आलू भी नहीं खिला पा रहे हैं। आमदनी है नहीं खर्चा इतना है कहां से गृहस्थी पालंे, कहां से खिलाएं। बेटा प्राइवेट काम करता है, पति की मौत हो गई है। अब बेटे को कभी काम मिल जाता है कभी नहीं मिलता। दूध घी है नहीं सब्जी भी नहीं खिलाएं तो क्या करें।
भरे हंै भंडार, फिर भी आलू 40 के पार
निकासी धीमी होने से थोक मंडी में आपूर्ति प्रभावित हो रही है। प्रभावित शीतगृह से 25 रुपये प्रति किलोग्राम निकासी कर बाजार में 40 रुपये प्रति किलोग्राम आलू बेचा जा रहा है।
किसानों के बहाने व्यापारियों ने शीतगृह में आलू रोक रखा है, आपूद्दत कम होने से दाम बढ़ते जा रहे हैं। इस पर लगाम की जिम्मेदारी उद्यान विभाग की थी, लेकिन वह भी खानापूर्ति कर रहा है। ऐसे में जिलाधिकारी से सख्तरूख अपनाने की उम्मीद लोग लगा रहे हैं। तारचंद गोस्वामी ने मांग की है कि 31 अक्टूबर के बाद शीतगृह संचालित नहीं दिये जाएं। कालाबजारी पकड़े जाने पर संबंधित के साथ उद्यान विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाये जिसस आलू के दाम नीचे आ सकें।
बिचैलिय बिगाड रहे प्याज का खेल
प्याज के दाम थोक मंडी में 45-50 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं, जबकि फुटकर में 60 से 70 रूपये प्रति किलो मिल रही है जबकि बिचैलिए इसे ठेल वालों को देने में पाच से 10 रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। इसके बाद ठेल वाले तो प्याज को कालोनियों में मनमाने दाम में बेच रहे हैं। ये दाम क्षेत्र अनुसार अलग-अलग हैं। आलू के साथ भी कुछ ऐसा ही हाल है।
अब आधे मेहनताने पर करना पड रहा काम
रोजगार की हालत यह है कि आधे मेहनताने पर काम करना पड रहा है। राया से प्रतिदिन मथुरा आकर एक दुकान पर काम करने वाले पीयुष का कहना है कि वह 12 हजार रूपये महीने मंे जिस दुकान पर काम करता था अब वही काम 6 हजार रूपये में करना पड रहा है। इस पर काम के घंटे और बढा दिये गये हैं। कई साथियों को काम से हटा दिया गया है। दूसरी जगह काम मिल नहीं रहा ऐसे में जितना मिल रहा है उसी मंे काम चला रह हैं। यही इंडस्ट्री ऐरिया से लेकर मजदूर मंडी तक है। मजदूर मंडी में कई कई दिन खडे रहने के बाद काम मिल रहा है। लोग काम पर नहीं ले जा रहे हैं। गांवों से आने वाले मजदूरों ने अब आना ही कम कर दिया है।
सब्जी रूपये प्रति किलो
बैंगन- 40 से 45
भिंडी- 40
प्याज- 60 से 70
परमल- 100 से 120
हरी मिर्च- 100
आलू- 35 से 40
टमाटर- 70
गोभी- 60
धनियां- 200
(भाव होलीगेट से डीग गेट तक लगने वाली सब्जी मंडी के हैं)













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