देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreअसम की चाय पर एक संकट जलवायु परिवर्तन का भी दिखाई दे रहा है। तापमान में अंतर और बारिश की कमी का असर आने वाले समय में चाय बागानों पर पड़ सकता है। हालांकि ट्रिप सिंचाई के माध्यम से इस चुनौती से लड़ा जा सकता है। अभी तक स्प्रिंग इरीगेशन के माध्यम से ही चाय बागानों की सिंचाई की जाती थी जिसमें बड़ी मात्रा में पानी बेकार चला जाता है।
बारिश की कमी से चाय बागानों को नुकसान
तापमान और बारिश में हो रहे बदलाव यानी जलवायु परिवर्तन का असर असम की चाय पर भी पड़ रहा है। वैज्ञानिक बताते हैं कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य तापमान बढ़ चुका है। यहां सूखे मौसमों का अंतराल लंबा होने लगा है और बारिश के ढर्रे में बदलाव हो रहा है। आने वाले समय से पानी की कमी से चाय बागान जूझ सकते हैं।
ड्रिप सिंचाई से इस चुनौती से निपटने की कवायद
टोकलाई टी रिसर्च सेंटर के निदेशक ए. के. बरुआ बताते हैं कि अभी चाय की खेती के दौरान स्प्रिंग इरिगेशन सिंचाई प्रणाली को अपनाया गया है जिसमें पानी काफी मात्रा में बर्बाद हो जाता है लेकिन इसके स्थान पर अब ड्रिप इरिगेशन प्रणाली को इस्तेमाल किया जाएगा ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके। एक अनुमान के मुताबिक ड्रिप सिंचाई से तकरीबन 25 प्रतिशत जल की बचत होगी।
50 फीसदी पानी की होगी बचत
अभी तक चाय के बागानों में स्प्रिंग इरिगेशन से सिंचाई की जाती है। इससे पानी ज्यादा खर्च होता है लेकिन अब यह संस्थान चाय के बागानों में ड्रिप सिंचाई का प्रयोग कर रहा है जिसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले आए हैं। इस तकनीक में पौधे की आवश्यकता के अनुसार उसको पानी दिया जाता है और करीब 50 फीसदी पानी की बचत की जा सकती है। ड्रिप सिंचाई का प्रयोग यदि असम के सभी चाय के बागानों में किया जाए तो हम हर साल बड़ी संख्या में पानी की बचत कर सकते हैं और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से ज्यादा बेहतर तरीके से निपट सकते हैं।













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