देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। पांच दिवसीय दीपोत्सव का यम द्वितिया के यमुना स्नान के साथ ही समापन हो गया। यमद्वितीया पर्व पर हजारों की संख्या में दूरदराज से आये श्रद्धालुओ ंने यमुना में डुबकी लगई। इसके लिए जिला प्रशासन ने अपनी ओर बेहतर बंदोबस्त किये थे। यमना के घाटों पर बेरीकेडिंग की गई थी। जगह जगह चेतावन बोर्ड भी लगाये गये थे जिससे श्रद्धालु गहरे पानी में जाने से बचें। इसके अलावा गोताखोरों और सुरक्षाकर्मियों को भी तैनात किया गया था। स्थानीय गोताखोरों और नाविकों की भी सुरक्षा व्यवस्था को चुस्तु दुरूस्त रखने और किसी भी तरह की अनहोनी को टालने के लिए मदद ली गई। यम द्वितीया पर यम की पफांस से मुक्ति के लिए भाई बहन एक दूसरे हाथ पकड कर एक साथ यमुना में डुबकी लगाते हैं, इस लिए महिला और पुरूषों के स्नान की अलग अलग व्यवस्था संभव नहीं है। इस लिए घाटों पर महिला सुरक्षाकर्मी भी बडी संख्या में तैनात किये गये थे। शहर के अंदर साफ सफाई के लिए सफाईकर्मी शिफ्टों में काम करते रहे और रात भर सफाई कार्य चलता रहा। यमद्वितीया पर बाजार में भी रौनक रही। मिठाई की दुकानों पर दिनभर भीड उमडती रही।
हजारों की संख्या में भाई बहनों ने यमुना मैया के आंचल में एक दूसरे का हाथ थामें डुबकी लगाई। यम फांस से मुक्ति की मान्यता का अनुसरण करते हुए श्रद्धा पूर्वक यमुना स्नान कर भाई बहनों ने यमुना रानी एवं धर्मराज के मंदिर के दर्शन किये। इसके बाद बहनों ने भाई के माथे पर तिलक लगा उनकी सकुशलता की प्रार्थना की। बहन और भाई एक दूसरे का हाथ पकड़ कर यमुना के घाटों की सीढ़ियां नीचे उतर गए। मां को नमन किया। यमफांस से मुक्ति की कामना हृदय में डुबकी लगाई। आधी रात से शुरू हुआ सिलसिला सूर्य किरणों के बिखरने तक चरम पर पहुंच गया। तब तक हजारों भाई बहन डुबकी लगाकर लौट चुके थे तो हजारों कदम यमुना की तरफ बढ़ रहे हैं। यम दूज पर विश्रामघाम श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
राया में पुलिसकर्मी करते रहे मशक्कत
जाम के लिए कुख्यात हो चले राया कस्बे को जाम से बचाने के लिए पुलिसकर्मी मशक्कत करते रहे। यहां हालाता यह हैं कि कुछ मिनट यातायत ठहर जाये तो ऐसा जाम लगता है कि खुलवाने में पुलिसकर्मियों को भी पसीना आ जाता है। घंटों की मशक्कत के बाद यातायात व्यवस्था दुरूस्त हो पाती है। इस बार पहले से ही इस बात को ध्यान में रखा गया था कि राया में जाम के गंभीर हालात नहीं बन पाएं। ट्रेन के आने और फाटक लगने पर पुलिसकर्मी वाहनों को बेतरतीब होने से रोकते रहे और और फाटक खुलने के बाद यातायात को सुचारू किया जाता रहा।
विश्राम घाट की ओर जगमग, दूसरा किनारा डूबा रहा अंधेरे में
मथुरा में कालिंदी का एक किनारा जगमगा रहा था और दूसरा घनघोर अंधेर में डूबा हुआ था। घाटों पर हजारों भाई बहन मां यमुना की छवि को निहार रहे थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया की घड़ी के आने का इंतजार कर रहे थे। घड़ी की सुई ने वक्त की धारा को बदला और मैया यमुनाजी की जयकार के घोष के साथ घाट गुंजायमान हो गए। हल्की ठंड थी, लेकिन विश्वास और अस्था के आगे ठंडक अपना कोई प्रभाव नहीं डाल पाई।
जाम से जूझता रहा शहर
शहर को जाम से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किये गये थे इसके बाद भी शहर में जगह जगह जाम के हालात बनते रहे। मुख्य तिराहे चैराहों पर पुलिस बल तैनात रहा लेकिन बाजार के अंदर जाम से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।













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