देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreलौह तत्व यानि आयरन हमारे शरीर के लिए काफी जरूरी है। आयरन की कमी से कई बीमारी की संभावना बढ़ जाती है और सबसे पहले एनीमिया के शिकार होते हैं। क्या है एनीमिया और इसके लक्षण, देश से इस बीमारी को दूर करने के लिए क्या कुछ प्रयास किए जा रहें हैं, जानते हैं।
क्या है एनीमिया?
एनीमिया का अर्थ है, शरीर के अंदर एक ऐसी स्थिति का हो जाना, जिसमें खून की कमी हो जाए और इस कारण मानव शरीर धीरे-धीरे साथ देना बंद करने लगे। अगर समय रहते इसका निदान न किया जाए, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। फिर रोगी की असमय मृत्यु तक हो जाती है। इसलिए केंद्र एवं राज्य सरकारें बीमारी के उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में कई पहल कर रही हैं। कई बार कैंप लगा कर एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण कर घर-घर खून की जांच तक की जाती है, जिससे देश की आम जनता को स्वस्थ रखा जा सके।
खून की कमी से होता है एनीमिया
दरअसल, हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन एक ऐसा तत्व है, जो शरीर में खून की मात्रा बताता है। पुरुषों में इसकी मात्रा 13.8 से 17.2 ग्राम/डीएल और महिलाओं में 12.1 से लेकर 15.1 ग्राम/डीएल (ग्राम/डीएल = प्रति ग्राम लीटर का दशमांश) होनी चाहिए। इस बीमारी को रक्ताल्पता भी कहते हैं और इसके होने के तीन प्रमुख कारण होते हैं। पहली- खून की कमी। दूसरी- लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में कमी और तीसरी- लाल रक्त कोशिकाओं के विनाश की उच्च दर का किसी भी शरीर में पाया जाना ।
ऐसे लोगों को होता है आसानी से एनीमिया
एनीमिया को लेकर डॉ. आशीष दुबे कहते हैं कि सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह रोग होता क्यों है? उन्होंने बताया कि ऐसे लोग, जो लंबे समय से किसी बीमारी या इंफेक्शन के शिकार हैं, उन्हें एनीमिया आसानी से हो जाता है। एनीमिया के कुछ प्रकार अनुवांशिक भी हैं, लेकिन यह खराब डाइट और जीवनशैली की वजह से ही ज्यादातर होता है।
एनीमिया के लक्षण
उन्होंने कहा कि जहां तक इसके लक्षणों के मिलने का प्रश्न है, तो थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन का असामान्य होना, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथ-पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि एनीमिया की तरफ इशारा करते हैं। इसके अलावा स्टूल के कलर में बदलाव, कम ब्लड प्रेशर, स्किन का ठंडा पड़ना, स्प्लीन का साइज बढ़ना भी एनीमिया के लक्षण हैं।
इस स्थिति में भी डॉक्टर से करें संपर्क
यदि सिर, छाती या पैरों में असामान्य दर्द हो, जीभ में जलन हो, मुंह और गला सूखे, मुंह के कोनों पर छाले हो जाएं, बालों का कमजोर होकर टूटना शुरू रहे, निगलने में तकलीफ होने लगे, स्किन, नाखून और मसूड़ों का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो समझ लेना चाहिए कि यह एनीमिया के गंभीर लक्षण हैं। अगर एनीमिया लगातार बना रहे, तो डिप्रेशन का रूप ले सकता है। इसलिए बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं और अपना इलाज शुरू करवाएं।
शरीर में कितना रहना चाहिए हीमोग्लोबिन?
डॉ. विनीत चतुर्वेदी ने कहा कि एनीमिया तीन तरह का होता है- माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर। यदि मनुष्य शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा 10 से 11 ग्राम/डीएल पर है, तो यह एक तरह से माइल्ड एनीमिया के लक्षण हैं। यह जब आठ से नौ ग्राम/डीएल पर आ जाए तो इसे मॉडरेट एनीमिया कहा जाता है और जब यह हीमोग्लोबिन आठ ग्राम/डीएल से भी नीचे पहुंच जाए, तो चिकित्सकों की भाषा में कहें, तो यह स्थिति बहुत गंभीरता को दर्शाने लगती है। हीमोग्लोबिन जितना नीचे जाएगा, मरीज के लिए जीवन का खतरा उतना ही बढ़ता जाता है, जिसेे तुरंत खून चढ़ाए बिना दूर नहीं किया जा सकता है ।
बीमारी होने के कारण
डॉ. कहते हैं कि एनीमिया कई वजहों से होता सकता है, जिसमें अहम रूप से लगातार खून बहने की वजह से भी शरीर में खून की कमी हो जाती है। फोलिक एसिड, आयरन, प्रोटीन, विटामिन सी और बी 12 की कमी भी इसके पीछे का कारण है। फैमिली हिस्ट्री में ल्यूकेमिया या थैलेसीमिया की बीमारी रही है, तो फिर उस स्थिति में एनीमिया होने के चांस 50 फीसदी बढ़ जाते हैं। ऐसे में जहां भारत सरकार का जोर है, इसे दूर किया जाए, वहीं, राज्य सरकारें इसे दूर करने के लिए अपने प्रोग्राम चला रही हैं, जिसमें कि इस समय मध्य प्रदेश में बहुत अच्छा कार्य हो रहा है।
Prasar Bharati News Service - PBNS
मध्य प्रदेश में पिछले दो साल से लगातार हो रहा अच्छा काम
इस संबंध में आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2020-21 के एनीमिया मुक्त भारत स्कोर-कार्ड में मध्य प्रदेश को मिली प्रथम रैंक में 64.1 प्रतिशत वैल्यू आंकी गई है, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। प्रदेश में आयरन फोलिक एसिड कवरेज के अंतर्गत छह से 59 माह के बच्चों का कवरेज 36.3 प्रतिशत, पांच से नौ वर्ष के बच्चों का कवरेज 71.6 प्रतिशत, 10 से 19 वर्ष के बच्चों का कवरेज 66.3 प्रतिशत, गर्भवती महिलाओं का कवरेज 95 प्रतिशत और धात्री माताओं का कवरेज 51.3 प्रतिशत रहा है, जो अन्य प्रदेशों की तुलना में कहीं ज्यादा है।
मध्य प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार देश में हर राज्य इस रोग से अपने को मुक्त रखने के लिए योजनाएं बनाता है और उन पर अमल करते हुए कार्य कर रहा है। लेकिन भारत के बड़े-छोटे राज्यों के बीच ''एनीमिया मुक्त भारत अभियान'' में मध्य प्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। मध्य प्रदेश में इस रोग को लेकर इन दिनों बेहतर कार्य हो रहा है, जिसके कारण से एनीमिया मुक्त भारत के वर्ष 2020-21 के इंडेक्स में मध्य प्रदेश प्रथम रहा है।
इससे पहले भी यह राज्य रहा है एनीमिया को दूर करने में सबसे आगे
इतना ही नहीं वर्ष 2019-20 में भी मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर था। इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एनीमिया मुक्त भारत अभियान में प्रदेश को प्रथम स्थान मिलने पर संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।













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