देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreहिन्दी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा और देव दीपावली भी कहते हैं। बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा सभी पूर्णिमाओं में श्रेष्ठ मानी जाती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने देवलोक पर हाहाकार मचाने वाले त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का संहार किया था। उसके वध की खुशी में देवताओं ने इसी दिन दीपावली मनाई थी।
हर साल लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली मनाते हैं। गुरूड पुरान के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मतस्यावतार लिया था। इस दिन गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने पुण्यकारी माना जाता है, कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर दीपदान करना भी विशेष लाभकारी होता है। कार्तिक पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर को पड़ रही है, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 'कार्तिक पूर्णिमा' कहते है। इसी दिन सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। उनके जन्मोत्सव को गुरु नानक जयंती के रूप में मनाया जाता है।
पूर्णिमा तिथि आरंभ: 11 नवंबर 2019 को शाम 06 बजकर 02 मिनट से।
पूर्णिमा तिथि समाप्तत: 12 नवंबर 2019 को शाम 07 बजकर 04 मिनट तक।
कार्तिक पूर्णिमा का कथा
एक बार की बात है त्रिपुर नामक राक्षस ने कठोर तपस्या की। त्रिपुर की इस घोर तपस्या के प्रभाव से सभी जड़-चेतन, जीव-जन्तु तथा देवता भयभीत होने लगे। तब देवताओं ने त्रिपुर की तपस्या को भंग करने के लिए खूबसूरत अप्सराएं भेजीं।
परंतु त्रक्षिपुर की कठोर तपस्या में वह बाधा डालने में सफल न पाईं। अंत में ब्रह्मा जी स्वयं उसके सामने प्रकट हुए तथा उससे वर मांगने के लिए कहा।
तब त्रिपुर ने ब्रह्मा जी से वर मांगते हुए कहा 'न मैं देवताओं के हाथ से मरु, न मनुष्यों के हाथ से।' वरदान मिलते ही त्रिपुर निडर होकर लोगों पर अत्याचार करने लगा। जब उसका इन बातों से भी मन न भरा तो, उसने कैलाश पर्वत पर ही चढ़ाई कर दी। इसके परिणाम स्वरूप भगवान शिव और त्रिपुर के बीच घमासान युद्ध होने लगा।
काफी समय तक युद्ध चलने के बाद अंत में भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु की सहायता से उसका वध कर दिया। इस दिन से ही क्षीरसागर दान का अनंत माहात्म्य माना जाता है।
साभार-khaskhabar.com













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