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जयंती विशेष-: मुख्यमंत्री, पटकथा लेखक और साहित्य सेवी एम. करुणानिधि का जन्मदिन आज

भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एम. करुणानिधि का आज जन्मदिन है। वे दो दशक तक तमिलनाडु  के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया था। राजनेता के रूप में तो उन्हें सब जानते हैं। राजनेता के अलावा वे प्रसिद्ध नाटककार और पटकथा लेखक भी थे। तमिल साहित्य और सिनेमा को समृद्ध करने में करुणानिधि का असीम योगदान रहा। करुणानिधि को कलाईनार के नाम से भी जाना जाता था। आइये, राजनीति से लेकर कला जगत तक, अपनी छाप छोड़ने वाले एम करुणानिधि की जीवन यात्रा पर नजर डालते हैं। 


तमिलनाडु में हुआ था करुणानिधि का जन्म

तमिलनाडु के तिरुक्कुवलई में 3 जून 1924 को एम करुणानिधि का जन्म हुआ। उनके माता-पिता का नाम मुत्तुवेल एवं अंजुगम था। उनके बचपन का नाम दक्षिणामूर्ति था। उन्होंने महज आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की थी। इस कक्षा में कई बार प्रयास करने के बाद भी वे पास न कर पाए। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। बचपन से ही एम.करुणानिधि का रुझान कला, साहित्य,कविता इत्यादि में था। बाद में राजनीति के दौरान भी कला पक्ष में उनकी रुचि बराबर बनी रही। 


तमिल सिनेमा और साहित्य में करुणानिधि का योगदान 

एम. करुणानिधि ने तमिल फिल्म उद्योग में एक पटकथा लेखक के रूप में अपने करियर का शुभारंभ किया। वे सामाजिक संदेश से भरी रचनात्मक कहानियां लिखते थे।
20 वर्ष की आयु में करुणानिधि ने ज्यूपिटर पिक्चर्स के लिए पटकथा लेखक के रूप में कार्य शुरु किया। उन्होंने अपनी पहली फिल्म राजकुमारी से लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने 75 से भी अधिक पटकथाओं का लेखन किया। उनकी प्रसिद्ध फिल्में  पनामा और थंगरथनम थी। तमिल साहित्य में भी एम. करुणानिधि का महत्तम योगदान है। उन्होंने कविता,कहानी,उपन्यास, जीवनी इत्यादि लिखा। उनकी लिखी प्रसिद्ध किताबों में रोमपुरी पांडियन, संग तमिल,नेंजुकू नीदि शामिल है। उन्होंने 100 से भी अधिक किताबें लिखी। पटकथा लेखक और तमिलनाडु के पांच बार के मुख्यमंत्री रहे, एम.करुणानिधि का वर्ष 2018 में 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

नारद संवाद

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