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ठा. श्री प्रियाकांत जू मंदिर पर जन्माष्टमी महोत्सव 30 को

मथुरा। ठा. श्री प्रियाकान्तजू मंदिर पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है । 30 अगस्त सोमवार को कन्हैया का प्राक्ट्योत्सव धूमधाम से मनाया जायेगा । देवकीनंदन महाराज के साथ सोमवार रात्रि भक्त कन्हैया के जन्म तक भजनों की मीठी मनुहार करेंगे । स्वर्ण बंशी और मुकुट धारण कर प्रियाकान्तजू सजीले वस्त्रों में भक्तों को दर्शन देंगे । जन्मोत्सव के लिये पूरे मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है ।


विश्व शांति सेवा चौरीटेबल ट्रस्ट सचिव विजय शर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रियाकान्तजू मंदिर पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हर्षाेल्लास के साथ मनाया जायेगा । मंदिर गर्भ गृह में फूल बंगला के बीच ठाकुरजी स्वर्ण बंशी एवं मुकुट धारण कर दर्शन देंगे । सोमवार को रात्रि 9.30 देवकींनदन महाराज महोत्सव प्रारम्भ करेंगे जो कन्हैया के प्राक्टयोत्सव पर 12.30 तक चलेगा ।

 


मंदिर मीडिया प्रभारी जगदीश वर्मा ने बताया कि पंचामृत अभिषेक के पश्चात लाला की महाआरती उतारी जायेगी । मधुर भजनों से कन्हैया की मनुहार होगी । विगत कई माह से बंद ब्रजगुफा को जन्माष्टमी पर भक्तों के लिये विशेष रूप से खोला गया है।


इस अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गुरूवार को देवकीनंदन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला एवं गोवर्धन पर्वत प्रसंग का वर्णन किया । वृन्दावन भागवत पीठाधीश्वर पुरुषोत्तमशरण शास्त्री महाराज ने व्यास पीठ पूजन किया। कथा की शुरूआत करते हुए उन्होने कहा कि भगवान का नाम भाव से लो या कुभाव से, कैसी भी अवस्था में जब भगवान के नाम का स्मरण करते है तब प्राणी का कल्याण होना प्रारम्भ हो जाता है । कहा कि इस संसार में राम-कृष्ण नाम के अलावा कोई भी सगा नहीं है । हरि नाम जाप और भक्ति ही आपके मरने के बाद भी काम आएगा।  


सनातन संस्कृति में ब्राह्मणो का महत्व बताते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा की दैत्य भी ब्राहम्णो से घृणा किया करते थे क्यूंकि ये सभी दैत्य जानते थे जब-जब ये ब्राह्मण यज्ञ करेंगे मन्त्र उच्चारण करेंगे, हवन करेंगे, भजन करेंगे उन सभी चीजों से धर्म को बल मिलेगा । देवताओ को शक्ति प्राप्त होगी और जब देवता बलवान होंगे तो राक्षशो का संहार होगा । यही मुख्य कारण है की ये राक्षश ब्राह्मणो और साधु संतो पर अत्याचार करते थे । उनके यज्ञो और तपस्याओं को भंग किया करते थे।

नारद संवाद

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