देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। कोरोना के कहर में देश सेवा के हजार रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई बेजुबान जानवरों का पेट भर रहा है तो कोई मुसीबत की इस घडी मे खून देकर किसी की जान बचा रहा है। बेसहारा लोगों की मदद को आगे बढे हाथ और जमबूत हो रहे हैं।
राया में लॉक डाउन के दौरान गरीब, निराश्रित, दिहाड़ी मजदूरों, ठेल आदि लगाकर जीवन यापन कर रहे लोगांे के लिए मददगार बनी समाजसेवी संस्था श्री हनुमान मढ़ी सेवा ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा थाना राया प्रभारी निरीक्षक सूरज प्रकाश शर्मा व कस्वा प्रभारी भोजराज अवस्थी के सहयोग से निराश्रित, मजदूर वर्ग, राहगीरों के लिए पिछले दस दिनों से अनवरत रूप से समय समय पर भोजन की व्यवस्था की गई है। हनुमान मढ़ी सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष झम्मन लाल सैनी ने बताया कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों के सहयोग से ट्रस्ट गरीबांे के भोजन की पूरी व्यवस्था कर रहा है। श्री हनुमानमढी सेवा ट्रस्ट में राया के ही चंदो लाला हलवाई भी अपने सेवा निशुल्क सेवा ट्रस्ट में दे रहे हैं। पूर्व सभासद कन्हैया लाल, सुशील कुमार उर्फ बंटी रावत, सतेंद्र सिंह, मयंक द्विवेदी, प्रवीन उपाध्याय, ओमप्रकाश छत्तीसगढ़ वाले, धर्मेंद्र सिंह, अशोक कुमार भी लगातार सहयोग कर रहे हैं।
मथुरा में परिक्रमा मार्ग में बेजुबानों का पेट भर रहे समाजसेवी
कोरोना वायरस के भयाभय संक्रमण के खतरे के चलते 21 दिन के लॉकडाउन से गिरिराज सात कोसीय गिरिराज परिक्रमा मार्ग में निराश्रितों सहित बेजुबान बंदर व गोवंश के सामने भोजन का संकट गहरा गया है। परिक्रमा में श्रद्धालुओं सहित स्थानीय लोगों के प्रतिबंध होने के बाद भूख से तड़फते बेजुवान बंदर और गोवंश मारे मारे फिरने लगे तो युवा व समाजसेवी मैदान मे उतरने लगे हैं। जहां परिक्रमा में निराश्रित भिखारियों को दस स्थानीय युवाओं के दल ने मोर्चा संभाल लिया। तो समाजसेवी भी गायों व बंदरों को भोजन लेकर परिक्रमा में पहुंचने लगे हैं। कोरोना के चलते भारत सरकार की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए युवा विष्णु जसावत, सौरभ जोशी खेडा, यश कौशिक, पालेन्द्र ठाकुर, शिशिर गुजराती, श्रेयस, राघव मित्तल आदि ने 25 मार्च से ही स्वयं सामग्री एकत्रित कर 200 डिब्बे भोजन तैयार कर शाम को तलहटी में बांटकर निराश्रितों को भोजन उपलब्ध करवाना शुरू कर दिया है।
जहां से मांग आती है वहीं पहुंचती है मदद
अक्षयपात्र की गाडियां भोजन लेकर आती हैं। जहां से मांग आती है वहीं आरएसएस के स्वयंसेवक अपनी अपनी मोटरसाइकिलों और गाड़ियों में लेकर उस भोजन को अलग अलग बस्तियों में वितरित करने पहुंच जाते हैं। कई मोहल्ले बस्तियां ऐसे हैं जहां के निवासियों ने अपने पार्षदों के माध्यम से प्रशासन के पास जरूरतमंदों की सूची भेजी है, वहां से भी मांग संघ के अधिकारियों के पास आती है, व आगे स्वयंसेवक तक पहुंचती है तो अगले दिन से उस बस्ती मेंभी बोजन वितरण शुरू हो जाता है, 12 हजार व्यक्तियों के भोजन से शुरू हुआ यह क्रम अब 18 हजार का आंकड़ा पार कर गया है। भोजन वितरण के क्रम में एक एक लेखपाल बंधु हर नगर में लगाए हैं जो वितरित हुए भोजन की परिवार के अनुसार सूची बनाते हैं।
भोजन वितरण में मुख्य रूप से संघचालक लालचंद जी, लक्ष्मी जी, तेजस्व, कौशलेश, संजय, पवन, अजय, भाग शारीरिक प्रमुख राजू, दुर्गाप्रसाद, रमेश, वेदांत, मोहनदास, अनुराग आदि मुख्य रूप से लगे हुए हैं।













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