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प्राकृतिक और पारंपरिक खेती को सरकार दे रही बढ़ावा

केंद्र सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। अब तक प्राकृतिक खेती के तहत 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है। इस बारे में कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्राकृतिक खेती के लिए तमिलनाडु राज्य सहित देश भर के 8 राज्यों में 4980.99 लाख रुपये की कुल धनराशि जारी की गई है।
 
 
पारंपरिक स्वदेशी पद्धतियों को दिया जा रहा बढ़ावा
 
केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकपी) को जीरो बजट प्राकृतिक खेती सहित पारंपरिक स्वदेशी पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए 2020-21 से परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVYE) की एक उप-योजना के रूप में शुरू किया गया है। इस योजना में मुख्य रूप से सभी सिंथेटिक रसायन से मुक्त खेती पर जोर दिया जाता है। साथ ही ऑन-फार्म बायोमास रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया जाता है। मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसान कैसे लाभ प्राप्त कर सकते हैं इसके बारे में भी उन्हें बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कहा कि भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) के तहत, कलस्टर निर्माण, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा निरंतर मार्गदर्शन, प्रमाणन और अवशेष विश्लेषण के लिए 3 वर्ष के लिए प्रति हेक्टेयर 12,200 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
 
 
क्या है भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) योजना
 
परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम (बीपीकेपी) के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक स्वदेशी प्रथाओं को बढ़ावा देना और कृत्रिम उत्पादों के प्रयोग को कम करना है। यह पद्धति काफी हद तक ऑन-फार्म बायोमास रीसाइक्लिंग पर आधारित है। इसके तहत बायोमास मल्चिंग, ऑन-फार्म गाय गोबर-मूत्र का उपयोग, आवधिक मिट्टी का मिश्रण और सभी सिंथेटिक रासायनिक आदानों का बहिष्कार पर मुख्य जोर देता है। यह योजना सभी सिंथेटिक रासायनिकों से मुक्त खेती को प्रोत्साहित करती है।

नारद संवाद

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