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नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल का आज आखिरी दिन है। संसद के सेंट्रल हॉल में प्रणब मुखर्जी का औपचारिक विदाई समारोह रखा गया है। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के मंत्री और दोनों सदनों के सांसद मौजूद रहेंगे। आपको बता दें कि इससे पहले बीती रात प्रधानमंत्री मोदी ने प्रणब मुखर्जी के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन रखा गया।
प्रणब मुखर्जी ने अपने 5 साल के कार्यकाल में राष्ट्रपति पद की गरिमा को नई ऊंचाईयों पर ले गए। एक शिक्षक से नेता और उसके बाद राष्ट्रपति तक का सफर तय करने वाले प्रणब मुखर्जी अपने शालीन व्यक्तिव और विद्वता के लिए जाने जाते हैं।
आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि राष्ट्रपति पद के रूप में प्रणब दा का कार्यकाल कभी विवादों में नहीं रहा। प्रणब दा ने अपने कार्यकाल का तीन साल मोदी सरकार के साथ गुजारा लेकिन कभी राष्ट्रपति और सरकार के बीच टकराव की स्थिति नहीं आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर प्रणब मुखर्जी की तारीफ करते दिखे। यहां तक की एक मौके पर नरेंद्र मोदी प्रणब मुखर्जी को पिता समान कहते-कहते भावुक हो गए थे।प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुआ। 1969 से वो लगातार पांच बार राज्यसभा के सांसद चुने गए। 1997 में वो सबसे उत्कृष्ट सांसद चुने गए। साल 2004 में उन्होंने पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा और लोकसभा में चुनकर पहुंचे इसके बाद 2009 में भी लोकसभा सांसद चुने गए।
कांग्रेस में उनका कद काफी बड़ा था और वो गाँधी परिवार के बेहद करीबी रहे। राष्ट्रपति बनने से पहले तक प्रणब मुखर्जी केंद्र सरकार में वित्त मंत्री रहे। वित्त मंत्री के अलावा प्रणब दा विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे अहम मंत्रालयों को भी संभाल चुके हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले तक प्रणब मुखर्जी यूपीए सरकार के संकट मोचक कहे जाते थे। यूपीए 1 और यूपीए 2 सरकार में ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने बातचीत के जरिए सरकार को संकट से उबारा।
साभार-khaskhabar.com













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