देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read More(पवन गौतम) : 2020 पता नहीं दुनिया के लिए कैसी तबाही लाया है. सोचने बैठो तो सोचते ही रहो. हर तरफ हाहकार हो रहा है. सभी देश अपनी-अपनी व्यवस्थाओं के साथ कोरोना का डट के मुकाबला कर रहे है. पर सोचिये उन देशों के लिए जहाँ सिर्फ पर्यटन, ही लोगों के जीने का सहार हो. खेर सभी देशों की अपनी-अपनी समस्याएँ है. भारत ईश्वर की धरती है..... हम सब ऐसे ही नहीं कहते। कोरोना जैसे की छू के निकल रहा है. आगे जो भी हो पर हम सब जब इस दौर से निकलेंगे तो धरती के एक कौने से दूसरे कौने तक सब बदला-बदला होगा। जब पूरा विश्व इससे लड़ रहा था. तब प्रकृति अपने स्वरूप में थी. नदियों से पेड़ पौधे, जीव-जंतु सभी आनंदमयी थे. समय समय पर प्रकृति अपना एहसास कराती है. पर हम उसे समझकर भी न समझी वाले काम करते है. भारतीय शास्त्रों के अनुसार देवासुर संग्राम से लेकर महाभारत जैसे भीषण युद्ध तक.....हमको क्या मिला क्या कोई सुख से रह सका. युगों पहले भी ये था और आज भी ये. बदला क्या सिर्फ सोच या और कुछ.... ? फिर मिलते आप से हम सब की बात (हमारी बात)













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