देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। कोरोना के खौफ के बीच किसान गैहूं की फसल की कटाई में व्यस्त हो गये हैं। ग्रामीण मजदूरों की कभी परेशानियां कुछ कम होंगे। लोगों को रोजगार गांव में ही मिल जाएगा। करीब दो महीने तक इन्ें बाहर जाने की जरूरत नहीं पडेगी। वैसे भी इन दिनों में बाहर काम करने वाले मजदूर भी गांव लौट आते हैं और अपने लिए साल भर का खाने का इंतजाम करते हैं।
जनपद में लॉकडाउन के चलते किसान परेशान है। उनकी खेतों में खड़ी फसलें कटने को तैयार है, लेकिन कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। कम्बाइन मशीनों का भी टोटा है, मशीन चालक भी मनमाने पैसे मांग रहे है। इससे बड़ी तादात में फसलें खराब हो सकती है और खाद्यान्न संकट भी पैदा हो सकता है। कोरोना संक्रमण के चलते पूरा देश लॉकडाउन है। इससे किसानों को भारी परेशानी हो रही है। इन दिनों उनके खेतों में रवि की गेहूं, सरसों आदि फसलें पककर तैयार हैं और कटने के इंतजार में हैं। लॉकडाउन के चलते किसान तो जैसे तैसे अपने खेतों पर पहुंच कर फसलों को देख आता है लेकिन मजदूरों के अभाव में उसकी कटाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में कृषि मजदूर भी अपने घरों से नहीं निकल रहे हैं। वहीं जनपद में कम्बाईन मशीनें भी काफी कम हैं। ज्यादातर मशीनें यहां पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों से आतीं थीं। लॉकडाउन के चलते वे मशीनें भी यहां नहीं आ पा रही है। ऐसे में यहां मौजूद कुछ कम्बाईन मशीनों के संचालक भी किसानों से दोगुना किराया मांग रहे हैं। बरसात और ओलावृष्टि से प्रभावित उनके खेतों में इतना अच्छी फसल भी नहीं हुई हैं कि वे दोगुना किराया देकर कटाई करा सकें। इससे परेशान किसान फसलों को भगवान भरोसे ही छोड़ने को मजबूर है। ऐसे में उनकी फसलें खेतों में ही खड़े-खड़े बर्बाद होने के कगार पर है।
जनपद के साथ आस पास के काफी क्षेत्रों में पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि और बरसात से काफी फसल बर्बाद हो चुकी है। हालांकि सरकार ने इसका मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। वहीं खेतों में बाकी बची फसलें भी अब लॉकडाउन के चलते कटाई न हो पाने के चलते खेतों में खराब होने के कगार पर है। इससे इस बार बेहद कम तादात में खाद्यान्न का उत्पादन होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह फसलें बर्बाद हो गई तो लॉकडान के बाद जनपद के साथ देश के तमाम हिस्सों में खाद्यान्न संकट भी पैदा हो सकता है।













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