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भारत और इजरायल के सहयोग से देश के पहले एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्र से किसानों को मिल रहा लाभ

मधुमक्खी पालन कृषि से जुड़ा बहुउपयोगी व्यवसाय है, जिसमें कम लागत और अधिक मुनाफा है। कृषि से जुड़े लोग या फिर बेरोजगार युवक इस व्यवसाय को आसानी से अपना सकते हैं। अगर भारत में मधुमक्खी पालन पर नजर डालें तो इसका इतिहास काफी पुराना रहा है। शायद पहाड़ों की गुफाओं तथा वनों में निवास करने वाले हमारे पूर्वजों द्वारा चखा गया प्रथम मीठा भोजन शहद ही था। उन्होंने इस दैवीय उपहार के लिए मधुमक्खियों के छत्ते की खोज की थी। लेकिन आज किसान इसे व्यवसाय के रूप में अपना कर रोजगार और आर्थिक साधन बना सकते हैं। 
 
भारत और इजरायल के सहयोग से देश का पहला एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्र

मधुमक्खी पालन की दिशा में एक और अध्याय तब जुड़ गया जब भारत और इजरायल के सहयोग से देश का पहला एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्र कुरुक्षेत्र के रामनगर में स्थापित किया गया। कुरुक्षेत्र और प्रदेश के अन्य मधुमक्खी पालकों ने बताया कि मधुमक्खी पालन से उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। अब न सिर्फ उन्हें मधुमक्खी पालन और शहद से संबंधित बारीक जानकारी मिल रही है बल्कि बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। 
 
मधुमक्खी पालन का वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण

रामनगर केंद्र में किसानों को मधुमक्खी पालन का वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण दिया जाता है, साथ ही उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले बक्से भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इस सेंटर पर ही किसान अपने शहद की गुणवत्ता की जांच करवाते हैं, फिर उसकी ब्रांडिंग, पैकिंग और ग्रेडिंग की जाती है और फिर इसे बाजार में उतारकर लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। 
मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे किसान अगर वैज्ञानिक ढंग से करें तो फसलों का पॉलिनेशन होता ही है। साथ ही साथ पैदावार भी बढ़ती है। कुरुक्षेत्र के किसान बड़े पैमाने पर मधुमक्खी पालन का कारोबार कर रहे हैं और अपनी आमदनी में इजाफा कर रहे हैं। 
 
 ‘मीठी क्रांति’ के तहत शहद के उत्पादन को बढ़वा

बता दें, कृषि और गैर कृषि परिवारों के लिए आमदनी और रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकार की ओर से लॉकडाउन के बाद से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी के तहत मीठी क्रांति के तहत कई प्रवासी कामगार मधुमक्खी पालन से जुड़े, जिससे देश में शहद उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। कुछ दिन पहले ही सरकार ने मधुमक्खी पालन के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत ‘मीठी क्रांति’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (एनबीएचएम) को 500 करोड़ रुपये के आवंटन किए गए हैं। हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि आज भारत प्रत्येक वर्ष लगभग 1.20 लाख टन शहद का उत्पादन करता है। शहद उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत निर्यात किया जाता है। बीते कुछ वर्षों में शहद व संबंधित उत्पादों का निर्यात बढ़कर करीब दोगुना हो चुका है। देश में गुणवत्तापूर्ण शहद का उत्पादन और अधिक हो सके इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

नारद संवाद

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