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भारत बंद को किसान संगठनों ने बताया सफल

मथुरा। तीन कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा के भारतबंद को स्थानीय किसान संगठनों ने सफल बताया है। किसान नेताओं का कहना है कि लोगों के बीच तीन कृषि कानूनों को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। किसान आंदोलन को इतने लम्बे समय तक चलने के पीछे का मकसद भी यही है कि आम आदमी इस बात को समझे और चर्चा करे कि कृषि कानूनों में उनके लिए क्या है।

जो अब हो रहा है। भारतबंद के दौरान जनपद में जगह जगह किसानों ने प्रदर्शन किया। तीनों कृषि कानून देश के हित में नहीं हैं, इसे किसानों के साथ ही अब दूसरे लोग भी समझ रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन अम्बावता के जिलाध्यक्ष राजकुमार तौमर ने भारतबंद को जनपद में पूरी तरह से सफल बताया। उन्होंने कहाकि किसान बाजार में दुकान नहीं करते हैं। वह खेत में काम करते हैं। किसान की अधिकतम पहुंच मंडी तक है।

किसान मंडी बंद करा सकते हैं। किसानों की बाजारों में दुकानें नहीं हैं जिन्हें वह बंद कर दें। कृषि कानून किसानों के हित में नहीं है अब यह बात आम किसान समझ रहा है, यही इस आंदोलन की सफलता है। इसी संगठन के लेखराज सिंह कहते हैं कि हम लम्बे समय तक सडक जाम रख सकते हैं लेकिन इससे आम आदमी को परेशानी होगी। हमारे आंदोलन का मकसद यह नहीं है। भारतबंद के जरिए जो संदेश देना चाहते थे वह आम जनता तक पहुंचा है। भाकियू टिकैत गुट के प्रदेश उपाध्यक्ष बुद्धा सिंह प्रधान भी दावा कर रहे हैं कि भारतबंद मथुरा जनपद में सफल रहा है।

उन्होंने कहाकि कृषि कानून से खेती किसानी चौपट होगी दुकानें नहीं। अगर आंदोलन का असर देखना है तो गांवों में जाकर देखो, किसानों से बात करने पर पता चलेगा कि आंदोलन कितना सफल रहा है। भाकियू जिलाध्यक्ष देवेन्द्र रघवंशी भारतबंद को सफल मान रहे हैं। दूसरे किसान संगठन और उन राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की प्रतिक्रया भी भाकियू नेताओं से मिलती जुलती है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष भगवान सिंह वर्मा कहते हैं कि किसान आंदोलन की तुलना राजनीतिक दलों और व्यपारी संगठनों के आंदोलनों से नहीं की जा सकती है। किसान आंदोलन की की प्रवति को समझना होगा।

किसान आंदोलन की सफलता इसके विस्तार में  है। आम आदमी पार्टी के जिला महासचिव सुरेश सैनी भी कुछ ऐसा ही कहते हैं। उनका मनना है कि किसान आंदोलन देश में हुए दूसरे आंदोलनों से अलग है। इस आंदोलन की सफलता या असफलता बाजार के खुलने या बंद होने से तय नहीं हो सकती है।

नारद संवाद

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