देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। यम द्वितीया स्नान के लिए यमुना में अतिरिक्त जल छोडा गया लेकिन इस जल को गोकुल बैराज से आगे नहीं जाने दिया गया। इससे यमुना घाटों पर जल स्तर तो बढा लेकिन प्रदेषण स्तर में ज्यादा गिरावट नहीं आई। यमुना में जल प्रवाह बने रहने पर प्रदूषण का स्तर जरूर कुछ कम होता लेकिन ऐसा होने पर कई घाटों से पानी दूर ही रहता और श्रद्धालुओं को कीचड में धंस कर स्नान करने के लिए जाना पडता। एक बार फिर बडी संख्या में भाई बहन श्रद्धालु यम की फांस से मुक्ति के लिए यमुना स्नान के लिए आये जिनमें से कई को यमुना के प्रदूषित जल को देख ने के बाद सिर्फ
छेंटे मारकर काम चलाना पडा। वहीं बडी संख्या में श्रद्धालु ऐसे थे जिन्होंने यमुना में डुबकी लगाई। आचमन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या नगण्य थी। अब यमुना जल के दूषित हो जाने की बात किसी से छुपी नहीं रही है। हाल ही में बरसाना के मान मंदिर की ब्रज चैरासी कोसी यात्रा में आचम के बाद बडी संख्या में श्रद्धालुओं के बीमार पड जाने के कारण भी लोगों को भय बना हुआ है। वर्षों से यमुना स्नान और आचमन की परंपरा को निभाते चले आ रहे श्रद्धालु भी इस बार आचमन करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। हालांकि लोगों का कहना है कि एक तरहे से यह सही फैसाल भी है।
नहीं जारी की गई कोई चेतावनी
अतिरिक्त पानी छोडे जाने के बाद स्नान वाले घाटों पर यमुना प्रदेषण का स्तर कितना कम हुआ इस बात की कोई रिपोर्ट जिला प्रशासन की ओर से जारी नहीं की गई। हालांकि जिला प्रशासन ने हजारों लोगों के स्नान शुरू करने से पहले किसी तरह की कोई चेतावनी या सुक्षाव भी जारी नहीं किये गये। श्रद्धालुओं को उनके विवेक पर छोड दिया गया कि वह स्नान करें, आचमन करें या बिना स्नान और आचमन के ही वापस लौट जाएं।













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