देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता परिषद्, भारत के तत्वाधान में बार कौंसिल ऑफ इण्डिया के चेयरमेन को सम्बोधित करते हुए ज्ञापन सौपा गया। जिसके विषय में परिषद् की राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ रागिनी गांधी ने बताया कि इस ज्ञापन के जरिये ये मांग की गयी कि अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 2 (1) के तहत राज्य विधिज्ञ परिषद् की नामावली में दर्ज अधिवक्ताओं को ही प्रैक्टिशनर अधिवक्ताओं की श्रेणी में रखा जाये और बेवजह उनका सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस के नाम पर शोषण न किया जाए।
क्यु कि वकालत की शुरुआत करने वाले अधिवक्ता कहां से पांच साल के वकालतनामा लाएंगे अतः इस सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस की अनिवार्यता को समाप्त किया जाये और अधिवक्ताओं को इस व्यतिकारी नियम से मुक्ति दिलाई जाए यदि परिषद् की इस मांग पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो देश भर में राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में आंदोलन चलाया जायेगा इस ज्ञापन को बार के अध्यक्ष
सुशील शर्मा एवं सचिव सुनील चतुर्वेदी को सौंपा गया ,परिषद की अन्य पदाधिकारी वरिष्ठ अधिवक्ता मनवीर सिंह अधिवक्ता श्रीमती संगीता शर्मा राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, वरिष्ठ प्रदेश महामंत्री चंद्रकांता , मंडल आगरा अध्यक्ष दीपा चतुर्वेदी जनपद अध्यक्ष ,राजेश कुमारी,जनपद सचिव रेखा रानी, पुष्पा गुप्ता ,तथा सुनील शर्मा मौजूद रहे।













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