देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read More'पर्यावरण' और 'प्लास्टिक' के बीच कोई रिश्ता नहीं हो सकता। सब जानते हैं कि प्लास्टिक प्रदूषण हमारे पर्यावरण को काफी तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है क्योंकि प्लास्टिक पदार्थों से उत्पन्न कचरे का निस्तारण काफी कठिन होता है। सिर्फ इतना ही नहीं, आज पूरी पृथ्वी पर प्रदूषण में भी इसका काफी अहम योगदान है, जिससे यह एक वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। फिर भी न जाने क्यों किसी का इस और ध्यान क्यों नहीं गया कि प्लास्टिक की थैली में रखकर ही आखिर क्यों पौधे रोपित किए जाते हैं। जी हां, हर वर्ष ''पर्यावरण दिवस'' के अवसर पर पर्यावरण उत्थान को लेकर परम्परागत तौर पर देश भर में जगह-जगह पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और इस बार भी ये आयोजन बहुतायत में हुए हैं, लेकिन इन कार्यक्रमों से जुड़ी एक खास बात यह भी है कि इन पौधा रोपण में प्लास्टिक की थैली में रखकर लाए गए पौधों की प्लास्टिक बाद में खुले में छोड़ दी जाती है। ऐसे में पौधों के पर्यावरण उत्थान के साथ ये सभी प्लास्टिक थैलियां हानिकारक साबित होती हैं। अब इस समस्या का समाधान आखिर सुरक्षित पर्यावरण के लिए पौधा रोपण कैसे हो? इसे ध्यान में रखकर किया गया एक नया आविष्कार सामने आया है।
ईको फ्रेंडली ''प्रोट्रे मेकिंग मशीन'' का आविष्कार
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के युवा कृषि वैज्ञानिक ने प्लास्टिक थैली मुक्त सुरक्षित पर्यावरण उत्थान को दृष्टिगत रखते हुए ''पर्यावरण दिवस'' पर पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक ईको फ्रेंडली ''प्रोट्रे मेकिंग मशीन'' का आविष्कार किया है। वैसे तो जिले के पिपरई कस्बा क्षेत्र के जमाखेड़ी गांव निवासी राजपाल नरवरिया कृषि क्षेत्र में पहले भी कई आविष्कार कर चुके हैं, और इन आविष्कारों के प्रतिफल स्वरूप राष्ट्रपति भवन से पुरस्कृत हो चुके हैं, लेकिन आज विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर इनका यह आविष्कार बेहद महत्व रखता है।
होता है गोबर और कृषि अवशिष्ट का उपयोग
राजपाल नरवरिया ने प्लास्टिक थैली मुक्त पौधा-रोपण को लेकर आज हुए ईको फ्रेंडली प्रोट्रे मेकिंग मशीन के आविष्कार को लेकर बताया कि यह ईको फ्रेंडली प्रोट्रे मेकिंग मशीन उनके द्वारा पर्यावरण प्रेमियों के लिए बनाई गई है, जोकि देखने में एक साधारण डिवाइस है। इसमें गोबर और कृषि अवशिष्ट का उपयोग करके पौधा लगाने के लिए विशेष प्रकार की पर्यावरण कूल प्रोटो तैयार की जाती है, जिसके उपयोग से पौधे नर्सरी तैयार करने के लिए प्लास्टिक थैलियां और अधिक खाद्य की आवश्यकता नहीं होती।
ऐसे आया मशीन बनाने का विचार
राजपाल कहते हैं कि अक्सर पौध नर्सरी तैयार करने के लिए प्लास्टिक की थैलियों में खाद् भरकर पौधे तैयार किए जाते हैं, जबकि हम सभी जानते हैं कि प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदेह है। ऐसे में जब इस समस्या पर विचार करते हुए द्वारा बार-बार सोचा गया तो इसके विकल्प की तलाश तेज हुई। वे कहते हैं कि फिर जब उनका ध्यान सड़क पर पड़े गोबर और कृषि अवशिष्टों पर गया तो इनका उपयोग प्लास्टिक थैलियों की जगह पौधों एवं सब्जियों की नर्सरी उगाने के लिए प्रो ट्रे बनाने के रूप में किया जा सकता है यह ख्याल मन में आया, फिर मैं इस कार्य में लग गया और आज यह अविष्कार सबके सामने है ।
एक बार में छह प्रो ट्रे सेट होते हैं तैयार
उन्होंने यह भी बताया कि यह एक हाथ से चलाई जाने वाली मशीन है, जिसके द्वारा पशुओं के गोबर से ईको फ्रेंडली प्रो ट्रे बनाने का कार्य किया जाता है। यह लोहे से तैयार की गई मशीन चौकोर आकार में है। मशीन में प्रो ट्रे निर्माण संबंधित कुछ प्रणालियां लगाई गईं हैं, जिसको अंदर से छह भागों में विभाजित किया गया है, जिससे एक बार में छह खण्डों में प्रो ट्रे का सेट तैयार होता है।
चलाने में बहुत आसान
राजपाल कहते हैं, मशीन का संचालन बहुत ही सरल और सुविधाजनक है, जिसको कोई भी महिला-पुरुष संचालित कर सकता है। मशीन बहुत ही सस्ती है और बिजली का खर्चा भी नहीं। मशीन से निर्मित प्रो ट्रे ईको फ्रेंडली होने के कारण स्वयं ही खाद का कार्य करती है।
आविष्कारित मशीन के फायदे
इस मशीन से तैयार किए गए उत्पाद से पौध नर्सरी तैयार करने के लिए प्लास्टिक थैलियों की जरूरत नहीं होती। जहां अब तक पौधा रोपण के बाद प्लास्टिक थैलियों को खुले में फेंक दिया जाता है, जिससे पर्यावरण नुकसान के साथ पशुओं द्वारा खाने से उनकी अकाल मौत तक हो जाती है। तब इस मशीन द्वारा निर्मित विधि से पौधों को जमीन में प्रो ट्रे सहित रोप दिया जाता है, जिससे पौधों की जड़ें नहीं टूटती हैं तथा पौधों की जड़ों में यह प्रो ट्रे खाद्य का काम करती है। इस मशीन के संचालन एवं रखरखाव का कोई खर्च भी नहीं है।
मशीन से मिलेगा हजारों को रोजगार
इस मशीन के उपयोग से हजारों को रोजगार मिल सकता है। खास तौर से दूरस्थ अंचलों में महिला-पुरुष रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, वहीं पर्यावरण प्रेमी, उद्यानिकी विभाग, वन विभाग अपने यहां प्लास्टिक थैली मुक्त पौध नर्सरी तैयार कर सकते हैं।













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