देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बुरा है। ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को उनके हाल पर छोड दें तो भी तस्वीर बेहद निराशा जनक है। सांसद हेमा मालिनी, महानिदेशक परिवार कल्याण के बाद अब उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया है। इस बीच कई अन्य स्तरों से भी चिकित्सालय का निरीक्षण हुआ। हर बार सभी ने व्यवस्थाओं पर असंतुष्टि जाहिर की और निर्देश दिये। हर बार निर्देश देने वाले और लेने वाले इन निर्देशों को भूल गये। हालात पहले जितने खराब से अगले निरीक्षण में उससे भी खराब मिले लेकिन .निर्देष-निर्देश’ खेलने का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।
बुधवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने मथुरा के जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां अनियमितताओं को स्वीकारा और कहा कि कमियां जल्द दुरुस्त की जाएंगी। लावारिस वार्ड में दुर्गंध देख भड़क गए। बोले, एक घंटे के अंदर यहां से मरीजों को शिफ्ट किया जाए। निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए।
सुबह साढ़े नौ बजे अस्पताल पहुंचे ऊर्जा मंत्री ने यहां आरओ का पानी खुद पीकर देखा। उन्होंने सीएमओ डाॅ. शेर सिंह से चिकित्सकों के बारे में पूछताछ की। कहा कि कितने डाॅक्टर मथुरा में रहते हैं और कितने प्रतिदिन आगरा से आते-जाते हैं। आयुष्मान योजना के कार्ड के बारे में भी पड़ताल की। सर्जिकल वार्ड पहुंचे श्रीकांत शर्मा ने मरीजों और उनके तीमारदारों से भी इलाज के बाबत पूछताछ की। लावारिस वार्ड में उठ रही दुर्गंध पर नाराजगी जताई। सीएमएस से कहा कि आप यहां बैठ सकते हैं क्या। एक घंटे के अंदर लावारिस मरीजों को शिफ्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने किचिन, ट्रोमा विंग का भी निरीक्षण किया। ट्रोमा विंग की व्यवस्थाओं से वह संतुष्ट नहीं थे। निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
ये है जिला चिकत्सालय की हालत
-एक्सरे मशीन 35 साल पुरानी है, इसकी जगह डिजिटल एक्सरे मिल जाए तो बेहतर होगा।
-एक्सरे और अल्ट्रा साउण्ड के लिए मरीजों को दिया जा रहा है एक से दो महीने आगे की तारीख
-प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर अधिकाश दवाएं ऑर्डर देने बावजूद उपलब्ध नहीं हो रही हैं।
-जिला चिकित्सालय में ठीक से कभी चालू नहीं रहा है ट्रोमा सेंटर
-काफी पुराना और बेहद छोटा है ऑपरेशन थियेटर, हर बार की जाती है अपग्रेड करने की बात
-ब्लड बैंक में ब्लड सेप्रेशन कक्ष में खराब रहती है मशीन।
-एक्सरे और अल्ट्रा साउण्ड टेक्नीशियन के पद हैं खाली
-महिला जिला अस्पताल में रात के समय नहीं रहते चिकित्सक
-महिला चिकित्सालय में रात के समय अगर आपरेशन की जरूरत पड जाए तो कोई व्यवस्था नहीं है
-चिकित्सालय में लगे सीसीटीवी कैमरे लम्बे समय से खराब पडे हैं
जहां सामान्य बुखार का इलाज नहीं, वहां बात बात पर अलर्ट
इसे सरकारी कामकाज का ढर्रा ही कहा जा सकता है जहां सामान्य बुखार का इलाज नहीं वहां देश भर में कहीं भी फैलने वाली गंभीर बीमारियों पर अलर्ट जारी कर दिया जाता है। इस अलर्ट का लाभ क्या है यह तो अलर्ट जारी करने वाले और अलर्ट होने वाले ही बेहतर जानते हैं। चमकी बुखार फैलने की खबरों और मौतों के बीच जिला चिकित्सालय भी अलर्ट पर था। हद तो तब हो गई जब अलग से एक वार्ड भी बना दिया गया।
बाहर की दवाएं लिखते हैं, बाहर रेफर करते हैं
जिला चिकित्सालय में इलाज और दवाएं मुफ्त मिलंेगी यही सोच कर कोई अपने मरीज को यहां लाता हैै। अस्पताल में दवाएं नहीं होने पर अस्पताल के अंदर ही सस्ती दर पर दवाएं बेचने वाला मेडिकल स्टोर खुला हुआा है। इस स्टोर की भी हालत खराब है। यहां चिकित्सक बाहर की दवाएं खिलते हैं और मरीज को बाहर के कमीशन वाले हास्पीटल के लिए लिए रैफर करते हैं।
ये कहा था महानिदेशक परिवार कल्याण ने
महानिदेशक परिवार कल्याण नीना गुप्त ने निरीक्षण के बाद कहा था कि अस्पताल में बहुत सारी कमियां में मिली हैं। एक्सरे मशीन बहुत पुरानी है। डॉक्टर कम रहते है। ट्रॉमा सेंटर चालू होना चाहिए उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। वार्डव्बॉय की कमी को आउट सोर्सिंग से पूरा किया जा सकता है। मरीजों को बेहतर उपचार मिलना चाहिए। कमियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
इमरजेंसी स्थिति में हमारे फोन करने पर डॉक्टर फोन तक रिसीव नहीं करते। अवकाश से लौटने के बाद हालातों से सीएमएस को अवगत कराएंगे।
डॉ. अनीता शर्मा, प्रभारी सीएमएस













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