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खाद्य तेलों की कीमतें कम होने की संभावना, सरकार ने स्टैन्डर्ड रेट ऑफ ड्यूटी घटाई

पिछले कुछ समय से खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार उछाल आया है। इसे काबू में रखने के लिए सरकार ने समय-समय पर कई प्रयास किए हैं। इस क्रम में ग्राहकों को उचित मूल्य पर खाद्य तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना के माध्यम से खाद्य तेलों पर ड्यूटी कम की गई है, जिससे उनकी कीमतें बेकाबू न हों।

क्रूड के साथ रिफाइंड पर भी ड्यूटी घटाई है
10 सितंबर 2021 को केंद्र सरकार ने अधिसूचना संख्या 42/2021 सीमा शुल्क के द्वारा एक बार फिर से क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर कम कर दी हैं। इसके अलावा क्रूड सनफ्लॉवर तेल पर 11 सितंबर से शुल्क की स्टैन्डर्ड दर 2.5 प्रतिशत रहेगी। क्रूड ऑइल के साथ-साथ रिफाइंड पाम ऑयल, रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड सनफ्लॉवर तेल पर 11 सितंबर से शुल्क की स्टैंडर्ड दर 32.5 प्रतिशत तय की गई है।

अगले आदेश तक यही शुल्क रहेगा लागू
10 सितंबर 2021 को केंद्र सरकार ने जो अधिसूचना संख्या 43/2021- सीमा शुल्क, जारी की है, उसके जारी होते ही वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की 29 जून, 2021 को जारी की गई अधिसूचना संख्या 34/2021- सीमा शुल्क, अपने आप ही रद्द हो गई है। पुरानी अधिसूचना के तहत शुरू किए जा चुके कार्यों को छोड़कर बाकि सभी पर नवीनतम आयात शुल्क, जो 11 सितंबर 2021 से प्रभावी हुआ है, अगले आदेश तक लागू रहेगा।

उल्लेखनीय है कि खाद्य तेलों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें और इस क्रम में घरेलू कीमतें 2021-22 के दौरान लगातार बढ़ रही है, जो महंगाई के साथ ही उपभोक्ताओं के नजरिये से बड़ी चिंता की वजह है। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क उन प्रमुख वजहों में से एक है, जिनसे खाद्य तेलों की आवक की लागत और फिर घरेलू कीमतें प्रभावित होती हैं।

कीमतों को कम रखने के लिए उठाए हैं कई कदम
खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के क्रम में, भारत सरकार ने फरवरी, 2021 से अगस्त, 2021 के बीच कई कदम उठाए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कदम इस प्रकार हैं-

इम्पोर्ट ड्यूटी को किया था कम
29 जून, 2021 को केंद्र सरकार ने अधिसूचना संख्या 34/2021- सीमा शुल्क, के माध्यम से अगले दिन यानि 30 जून से क्रूड पाम ऑयल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर घटाकर 10 प्रतिशत कर दी थी और यह 30 सितंबर, 2021 तक प्रभावी रहेगी। इम्पोर्ट ड्यूटी खाद्य तेल की कीमतों में बड़ी भूमिका निभाती है क्योंकि ज़्यादारतर खाद्य तेल भारत आयात करता है।

इसके अलावा सरकार ने 330 जून 2021 से डीजीएफटी अधिसूचना संख्या 10/2015-2020, के माध्यम से रिफाइंड पाम ऑयल की आयात नीति को संशोधित करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से “प्रतिबंधित” की श्रेणी से “मुक्त” श्रेणी में कर दिया था। यह इस साल के अंत तक प्रभावी है। इसके साथ ही, रिफाइंड पाम तेलों को केरल में किसी भी बंदरगाह से अनुमति नहीं दी गई है।

इससे पहले भी क्रूड खाद्य तेल पर घटाई थी ड्यूटी
19 अगस्त 2021 को केंद्र सरकार ने अधिसूचना संख्या 40/2021- सीमा शुल्क,के माध्यम से क्रूड सोयाबीन तेल और क्रूड सनफ्लॉवर तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर घटाकर 7.5 प्रतिशत और रिफाइंड सोयाबीन तेल व सनफ्लॉवर तेल पर 37.5 प्रतिशत कर दी थी। यह वित्त मंत्रालय में भारत सरकार 29 जून की अधिसूचना संख्या 34/2021- सीमा शुल्क, में संशोधन के माध्यम से किया गया था।

जल्दी क्लियरेन्स के लिए की गई है समिति गठित
कोविड-19 के चलते इम्पोर्ट होने वाले खाद्य तेलों ले लेट होने वाली खेपों को जल्दी क्लियरेन्स मिल जाए इसके लिए सरकार ने एक समिति गठित की है। इस समिति में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, उपभोक्ता मामले और सीमा शुल्क विभाग शामिल हैं जो साप्ताहिक आधार पर आयातित खाद्य तेलों की खेप की समीक्षा करते हैं और सचिव (खाद्य) की अध्यक्षता वाली कृषि कमोडिटीज पर बनी अंतर मंत्रालयी समिति को अवगत कराते हैं।
खाद्य तेलों की आयातित खेपों को तेज मंजूरी के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है। खाद्य तेलों के मामले में खेप की मंजूरी के लिए औसतन ड्वेल टाइम घटकर 3.4 दिन हो गया है।

ग्राहकों को होगा लाभ
शुल्क में कटौतियों से पहले ही एक साल में केंद्र सरकार के राजस्व पर अनुमानित 3,500 करोड़ रुपये का असर पड़ा है। जानकारों के अनुसार आयात शुल्क में ताजा कटौती से पूरे साल में 1,100 करोड़ रुपये का राजस्व पर असर पड़ने का अनुमान है, इस प्रकार सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को दिया गया कुल प्रत्यक्ष लाभ 4,600 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

अग्री सेस को बढ़ाया
इपोर्ट ड्यूटी कम होने से जनता को आखिर खाद्य तेलों की कीमतों में कमी देखने को मिलती लेकिन इसी अधिसूचना में क्रूड पाम ऑयल पर कृषि- उपकर 17.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि राजस्व पर लगातार बढ़ते बोझ के चलते ऐसा निर्णय लिया है।

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