देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकोविड रोगियों के लिए टू-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज दवा की पहली खेप आज जारी की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने इसे जारी किया। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने डॉक्टर रेड्डीज लैब के साथ मिलकर इस दवा को विकसित किया है। इस दवा के आपात इस्तेमाल की मंजूरी हाल ही में भारतीय औषधि महानियंत्रक ने दी थी। इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में इस दवा को एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ये अस्पताल में भर्ती मरीजों को तेजी से रिकवर करने में मदद करती है और उसके ऑक्सीजन सपोर्ट को भी कम करती है। इस दवा को द्वितीयक औषधि की तरह इस्तेमाल करने की परमिशन दी गई है।
ऐसे करना है दवा का इस्तेमाल
बताना चाहेंगे, 1 मई को डीजीसीआई की ओर से इसके आपातकाल उपयोग की अनुमति मिली है। पाउडर के रूप में इस ड्रग को एक सैशे में दिया जाएगा, जो पानी में घोलकर लेना होगा। यह दवा संक्रमित कोशिकाओं पर जाकर वायरस की वृद्धि को रोकने में सक्षम है।
दवाई के लॉन्च पर रक्षा मंत्री ने दी बधाई
दवा के लॉन्च के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे बनाने वाली सभी संस्थाओं और वैज्ञानिकों को बधाई दी। इसके अलावा रक्षा मंत्री कार्यालय ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से बधाई देते हुए लिखा, "डीआरडीओ एवं डीआरएल द्वारा तैयार की गई 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज ड्रग कोविड में प्रभावकारी सिद्ध होगी। यह हमारे देश के 'साइंटिफिक प्रोसेस' का एक बड़ा उदाहरण है, इसके लिए मैं डीआरडीओ और इस ड्रग की रिसर्च एंड डेवलपमेंट से जुड़ी सभी संस्थाओं को अपनी ओर से बधाई और शुभकामनाएं देता हूं"।
इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले हम डीआरडीओ का योगदान देश के रक्षा विभाग में देखते थे, लेकिन आज डीआरडीओ और इसके प्राइवेट क्षेत्र के सहयोगियों के स्वास्थ्य सेक्टर में अच्छे परिणाम देखकर मैं खुश हूं।
देश में स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही सरकार
डॉक्टर हर्षवर्धन ने कोविड रोधी दवा टू-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज विकसित करने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन तथा डॉक्टर रेड्डीज लैब के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह दवा वैज्ञानिकों की एक साल की कड़ी मेहनत का नतीजा है। डॉक्टर हर्षवर्धन ने बताया कि कोरोना वायरस को बढ़ने से रोकने में यह दवा काफी हद तक प्रभावी है। उन्होंने कहा कि सरकार देश में स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को निरंतर सुदृढ़ कर रही है। देश में प्रेशर स्विंग एडर्जोप्शन संयंत्र लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं और यह काम दो से तीन महीनों में पूरा कर लिया जायेगा।
ऐसा रहा 2-DG के क्लीनिकल ट्रायल का पूरा सफर
अप्रैल 2020 में, कोरोना की पहली लहर के दौरान डीआरडीओ की प्रयोगशाला नामिकीय औषधि तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी की मदद से प्रयोग करते हुए पाया कि ये मॉलिक्यूल SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी रूप से काम करता है और इसके वायरल विकास को रोकता है। इन्हीं परिणामों के आधार पर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने मई 2020 में कोविड-19 मरीजों पर 2-DG के दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल की मंजूरी दी थी।
ट्रायल में सुरक्षित पाई गई यह दवा
डीआरडीओ ने अपने इंडस्ट्री पार्टनर डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज के साथ कोविड-19 के मरीजों में दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता का परीक्षण करने के लिए क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया था। मई और अक्टूबर 2020 के बीच किए गए दूसरे चरण के ट्रायल में यह दवा कोविड-19 मरीजों में सुरक्षित पाई गई, जिसके चलते कोविड मरीजों की रिकवरी में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।
फेज II(a) का ट्रायल देश के 6 अस्पतालों में आयोजित किया गया था, जबकि फेज II(b) का ट्रायल 11 अस्पतालों में आयोजित किया गया था। बताना चाहेंगे कि यह ट्रायल 110 मरीजों पर किया गया था, जिसके सफल परिणामों के आधार पर डीजीसीआई ने नवंबर 2020 में क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण की अनुमति दी थी।













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