देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकल बहुत दिनों बात एक मित्र है भारत से बाहर उनसे बात हुई बोले अभी हाल ही मेने बच्चों के लिए उत्तराखंड के पहाड़ी हिल पे एक फार्म खरीदा है...अच्छा लगा जब कोई अपना आगे बढ़ता है...बधाई हो उनको...खेर यही से हमारा मस्तिष्क जो रुकने का नाम नहीं लेता तभी मन में एक विचार आया क्या हमारी इस धरा पे कोई चीज अपनी है की नही...मन तुरंत द्वापर युग जा पहुंचा...पांडवों के लिए पांच गांव मांगे थे दुर्योधन के पिता से पर उनकी चुपी पर दुर्योधन ने कहा सुई की नोक के बराबर न दो....फिर पहुंच गया मन ऋषि कश्यप के समय में ये धरा किसी न हुई हैं न होगी पर हम लोग सारा समय इस बात में लगा देते है...खेर इस मथुरा को ले लो पता नही कितने राजा गए कितने आए पर किस का हुआ किसी का नहीं...इसलिए अच्छा है आप आगे बढ़े पर उस मार्ग पे जहां शांति, संतुलन, और श्रीहरीहर का नाम हो.... क्योंकि व्यर्थ में इस जीवन को बर्बाद न करें.... क्योंकि आप से आपका कर्मों का हिसाब लिया जायेगा... न की आपके धन का या आपकी ख्याति का सिर्फ कर्म रखा जायेगा आपकी जीवात्मा के सामने.....इसलिए कर्म को देखिए जो हो रहा है वो तो होगा ही पर कर्म का परिणाम जरूर मिलेगा...आप सब से निवेदन है चाहे एक पेड़ लगाए या गंगा, यमुना, जंगल, पशु, पक्षी, कोई भी जीव जैसे हो मदद करें क्योंकि परमात्मा ने यहां हम और आपको अपनी सुविधा को इक्कठा करने के लिए नही भेजा....इनके लिए तो कलयुग के दानव ही बहुत है....जो इंद्र की तरह बैठे है हर क्षेत्र में...अपना दायित्व निभाए जो उचित लगे...आगे हरिहर इच्छा......













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