देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। लाकडाउन में लक्ष्मण रेखा के अंदर रहते-रहते ऊबना स्वाभाविक है। ऐसे में वायरस से बचना है और मन में नकारात्मक विचार पनपने नहीं देने हैं।
मनोचिकित्सक का कहना है कि लाकडाउन के चलते परिवार का कोई सदस्य बाहर है तो उनके सम्पर्क में रहिये। यह ऐसा वक्त है कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक के मन में तरह-तरह के सवाल पैदा होना स्वाभाविक है। बच्चों को जहाँ अपनी पढ़ाई और परीक्षा की चिंता है तो युवाओं का नौकरी और भविष्य को लेकर चिंतित होना लाजिमी है।
बुजुर्गों को जहाँ अपने परिवार की चिंता है तो वहीँ स्वास्थ्य को लेकर भी उनके मन में तरह-तरह के सवाल पैदा हो सकते हैं। इसलिए ऐसे वक्त में अपना कोई फोन करता है और समस्या को सुनकर अगर इतना भर कहता है कि- “मैं हूँ न” तो समझिये इतने भर से दुःख आधा हो जाएगा ।
लाकडाउन के चलते आपस में लोगों का मेलजोल कम हो गया है, जिसके चलते अवसाद और चिड़चिड़ापन की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे में अगर परिवार के साथ हैं तो आपस में बातचीत करते रहें।
दिनचर्या में बदलाव लाएं, कोई फिल्म या सीरियल देखें और किताबें पढ़ें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर सरकार तक को इस बात का एहसास है कि इन परिस्थितियों के चलते मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बढ़ जाएंगी। इसीलिए सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-5145 पर संपर्क करने को कहा है। हेल्पलाइन (न. 8887019140) शुरू की गयी है, जिसपर काउंसिलिंग की जाएगी और जरूरी उपाय भी बताये जायेंगे।













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