देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। जनपद में पराली जलाने की समस्या को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए समस्त हार्वेस्टर मालिकों को बुला कर उनके साथ बैठक की। इस दौरान हार्वेस्टर मशीन में एसएमएस लगाने के निर्देश दिये गये। बिना एसएमएस लगी हार्वेस्टर मशीन को खेत में नहीं चलने दिया जाएगा।
धान की फसल पूरे जनपद में होती है लेकिन छाता क्षेत्र में फसल कटाई के लिए हार्वेस्टर मशीन का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। छाता क्षेत्र में धान का रकवा दूसरी तहसीलों के मुकाबल ज्यादा है। इस बार धान की रोपाई भी औसत क्षेत्र फल से करीब पांच हजार हैक्टेयर अधिक हुई है। छाता क्षेत्र में विगत दिनों हुई बरसात में धान की कुछ फसल खराब हुई।
बावजूद इसके पराल की समस्या जस की तस है। विगत वर्ष प्रदेश भर में पराली जलाने के मामले में मथुरा जनपद पहले नम्बर पर रहा था। इसके बाद एनजीटी की सख्ती और सरकार के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन अभी से इस बात को गंभीरता से ले रहा है कि खेतों में पराली किसी भी कीमत पर नहीं जलनी चाहिए। दूसरी ओर बैठक के दौरान और बैठक के बाद हार्वेस्टर मशीन के मालिकों ने इस बात को लेकर ऐतराज कि एसएमएस लगाने का इस तरह आदेश यकायक नहीं देना चाहिए था। हार्वेटस्टर मालिकों का कहना था कि वह एसएमएस लगाने के लिए तैयार हैं लेकिन इतने कम समय में यह सब कर पाना उनके लिए संभव नहीं होगा।
बढ सकती है धान उत्पादक किसानों की परेशानी
ऐसे में धान उत्पादक किसानों की परेशानी बढ सकती है। छाता सहित कई दूसरे इलाकों में धान की फसल की अधिकांश कटाई हार्वेस्टर से होती है। अगर हार्वेस्टर मालिक तय समय में एसएमएस नहीं लागा सके और जिला प्रशासन अपनी बात पर अडिग रहा तो किसानों की फसल खेत में ही खडी रह जाएगी। जिससे किसानों के सामने विकट संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।













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