देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। किसानों के चहरे मायूस हैं। किसान नष्ट हुई फसलों की बालियां लेकर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर रहे हैं। राजनीतिक दलों ने भी सडक पर राजनीति शुरू कर दी है। धरना प्रदर्शन कर राजनीतिक दल किसानों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हर किसी में किसान हितैषी बनने और दिखने की होड मची है। राष्ट्रीय लोकदल कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के गेट के बाहर धरना दिया तो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता वट वृक्ष के नीचे धरना प्रदर्शन करने पहुंचे। जिलाधिकारी कार्यालय का गेट बंद कर दिये जाने के बाद रालोद कार्यकर्ता मुख्य गेट के सामने ही धरने पर बैठ गये और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दूसरी ओर सपा कार्यकर्ताओं ने वटवृक्ष के नीचे धरना देने के बाद किसानों को नष्ट हुई फसल के उचित मुआवजे की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। भारतीय किसा यूनियन लगातार आंदोलन कर रही है। दूसरी और सरकारी मशीनरी भी सक्रिय हो गई है। मांट विधान सभा क्षेत्र से विधायक
श्याम सुंदर शर्मा ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर किसानों के लिए उचित मुआवजे की मांग की।
बेमौसम बारिश और ओले ने मथुरा में फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। आलू, गेहूं और सरसों तीनों फसलों को नुकसान हुआ है। अभी भी खेतों में पानी भरा है। सब्जियों की फसल चैपट हुई है। मार्च में आलू की खुदाई समाप्त हो जाती है। दो-तीन दिन तक खेत में पानी भर जाने से सड़न की आशंका बढ़ जाती है। आलू की गुणवत्ता और उसके रंग पर असर पड़ता है। इस आलू को अधिक दिन भंडारित नहीं कर सकते हैं।
चार साल से परेशान किसान को इस साल आलू के अच्छे भाव मिलने की उम्मीद बंधी थी। लेकिन मौसम की बेरुखी के चलते आलू किसान संकट में आ गए हैं। गेहूं की फसल भी खेतों में लेट गई है और सरसों की फली फट गई है। अगर बारिश बंद नहीं हुई तो किसानों को काफी नुकसान होगा।
किसानों के चेहरों पर मायूसी है। सब्जियों की फसल भी चैपट हो गई है, वहीं गेहूं, जौ, चना, आलू और सरसों की फसलें भी ओलों की मार से खराब हुई है।













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