देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। दक्षिण भारतीय परंपरा के रंगजी मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव का मुख्य आकर्षण है रथ का मेला है। करीब 60 फुट लंबे विशालकाय रथ में विराजमान होकर जब भगवान श्रीगोदारंगमन्नार भ्रमण को निकलते हैं तो पूरा ब्रज ही नहीं अपितु आसपास के प्रांतों से भी श्रद्धालु दर्शन करने को उमड़ते हैं। रथ का मेला मंदिर निर्माण के समय से ही लोकप्रिय रहा है। मेले की रौनक जितनी आज है, उतनी ही रौनक शुरूआती दौर में भी थी। बढ़ती आबादी से भीड़ में भले ही इजाफा हुआ हो, लेकिन रथ के मेला की लोकप्रियाता में कमी नहीं आई। रथ के मेले ने स्थानीय लोग ही नहीं ग्रामीण व सुदूर क्षेत्र के श्रद्धालु और यूरोपियन को आकर्षित किया। ब्रिटिश काल में रथ के मेले का आकर्षण ऐसा था कि ब्रिटिश अफसर भी मेले का नजारा लेने आते थे।
रविवार की सुबह चांदी के श्रीशेषजी पर विराजमान होकर भगवान श्रीगोदारंगमन्नार नगर भ्रमण को निकले और शाम को कल्पवृक्ष पर भक्तों को दर्शन दिए। भगवान श्रीगोदारंमन्नार के दर्शनों को श्रद्धालुओं की भीड सड़कों पर उमड आई। शोभायात्रा में बैंडबाजों की धुन पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। जगह जगह आरती उतारकर श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रति अपनी आस्था जताई। 12 मार्च से चल रहे ब्रह्मोत्सव में रविवार को श्रीगोदारंगमन्नार भगवान ने चांदी के श्रीशेष जी पर दर्शन दिए। रंगजी मंदिर से मंगलवार की सुबह 8 बजे भगवान श्रीगोदारंगन्नार चांदी के श्रीशेषजी पर विराजमान हुए। ठाकुरजी के विराजमान होते ही भक्तों ने जयकारे लगाए तो वातावरण गुंजायमान हो उठा। धीरे-धीरे ठाकुरजी की सवारी मंदिर से बाहर निकली। जहां भक्तों का हुजूम दर्शन के लिए पहले से ही खड़ा था। मुख्य द्वार पर पहुंचते ही भगवान की आरती उतारने को भक्तों की लंबी कतार लग गई। रंगजी मंदिर से शुरू हुई सवारी नगर पालिका चैराहा होते हुए बड़ा बगीचा पहुंची। जहां विश्राम के बाद सेवायतों ने उनकी आरती उतारी और सवारी पुनरू मंदिर को लौटी।













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