देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। देश के बहुचर्चित और सबसे लम्बे चले केसों में से एक राजा मान सिंह हत्याकांड में तारीख पर तारीख के बाद आखिर फैसले की तारखी आ गई। करीब 35 साल चले इस मुकदमे में मथुरा जिला एवं सत्र न्यायालय में अदालत ने मंगलार को 11 आरोपियों पर दोष सिद्ध पाया है। अधिकतर अभियुक्तों की उम्र लगभग 80 के पार पहुंच गई है। जिससे उन्हें अब तारीखों पर भी आने में तकलीफ का सामना करना पड़ता है।
धारा 148, 149, 302 के तहत दोषी करार दिया गया है। जबकि सभी अभियुक्त सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। यह घटना 21 फरवरी 1985 को घटी थी। हत्या का मामला जयपुर की सीबीआई की विशेष अदालत में चला।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुकदमा वर्ष 1990 में मथुरा न्यायालय स्थानांतरित हो गया। इस मामले में यह जानना भी जरूरी है कि हत्याकांड से एक दिन पहले 20 फरवरी 1985 को राजा मान सिंह के खिलाफ राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर का हेलीकॉप्टर और मंच को तोड़े जाने की एफआईआर दर्ज की गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर पर पुलिस की जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था रही।

आम लागों का प्रवेश कोर्ट परिसर में रोक दिया गया था। पुलिस अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाये रहे। मथुरा पुलिस ने दोषी पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। इस मामले में 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। एक आरोपी पहले ही बरी हो चुका है जबकि तीन की मौत हो चुकी है। तीन आरोपियों को बरी किया गया है। भरतपुर रियासत के राजा मान सिंह हत्याकांड में मुकदमे की सुनवाई के लिए राजा मानसिंह की बेटी दीपा सिंह उनके पति विजय सिंह आदि परिजन भी मथुरा कोर्ट पहुंचे।
देशभर में चर्चित रहे इस मामले को ऐसे समझें
बचाव पक्ष के वकील ननंद किशोर उपमन्यु ने दलील पेश की थी और राजा मानसिंह की बेटी दीपिका रानी की तरफ से नारायण सिंह ने दलील पेश की। दोनों अभिवक्ताओं के अनुसार इस केस में 1700 तारीख और 8 बार फाइनल बहस हो चुकी हैं घटना के 35 साल बाद आज 21 जुलाई 2020 को फैसला आया है। बहुचर्चित हत्याकांड 21 फरवरी 1985 में हुआ था तत्कालीन राजस्थान मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर के हेलीकोप्टर में अपनी जोंगा जीप से टक्कर मारकर बाहर घूमने निकले थे। इस घटना के अगले दिन इनकी जीप को घेर सीओ कान सिहं के नेतृत्व में एसएचओ बीरेन्द्र सहित दर्जन पुलिसकर्मियों ने गोलियां बरसा कर मानसिहं सहित 3 की हत्या कर दी थी। राजा मानसिहं के दमाद बृजेश सिहं ने मुकदमा पंजीकृत कराया था। 28 फरवरी 1985 को यह केस सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने जुलाई 1985 में चार्जसीट जयपुर सेशन कोर्ट में दाखिल कर दी थी। राजा मानसिहं की बेटी दीपा रानी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मथुरा सेशन कोर्ट में स्थान्तरित करा लिया था।

78 गवाही के बाद मुकर्रर हो सकी निर्णय की तारीख
अधिवक्ता नारायण सिंह ने बताया कि पूरे केस में 61 गवाह अभियोजन पक्ष की ओर से तथा 17 गवाह बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए। जिनमें से बहुत से गवाह चश्मदीद भी थे। तारीख पर तारीख पड़ने के बाद निर्णय की तारीख तय हो सकी। 78 गवाही के बाद निर्णय की तारीख मुकर्रर हो सकी।
तीन अभियुक्तों की हो चुकी है मौत, एक बरी
अधिवक्ता नारायण सिंह ने बताया कि राजा मान सिंह हत्याकांड में सीबीआई द्वारा कुल 18 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दी है। इनमें से तीन अभियुक्त एएसआई नेकीराम, कांस्टेबल कुलदीप और सीताराम की मौत हो चुकी है, जबकि कान सिंह भाटी के चालक महेंद्र सिंह को जिला जज की अदालत ने बरी कर दिया है। अब जो अभियुक्त रह गए हैं उनमें सीओ कान सिंह भाटी, एसएचओ वीरेन्द्र सिंह, कांस्टेबल सुखराम, कांस्टेबल आरएसी जीवन राम, भावर सिंह, हरी सिंह, शेर सिंह, छत्तर सिंह, पदम राम, जग मोहन, एएसआई डीग पुलिस रवि शेखर, जीडी लेखक हरि किशन, जांचकर्ता कान सिंह सिरवी, गोविंद सिंह सहायक जांचकर्ता शामिल हैं।
एसपी सिटी ने सुरक्षा की समीक्षा की
फैसले से पहले न्यायालय की सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है। न्यायालय के आसपास और परिसर में करीब डेढ़ सेक्शन पीएसी तथा पुलिस बल तैनात किया है। एसपी सिटी उदय शंकर सिंह ने सोमवार को सुरक्षा संबंधी समीक्षा की। एसपी सिटी ने बताया कि न्यायालय को पूरी तरह से सुरक्षित किया गया है। पुलिस और पीएसी तैनात की गई है।
तारीखों के साथ केस का सफर
-20 फरवरी, 1985 को राजा मान सिंह ने जोगा से टक्कर मार सीएम के सभा मंच व हेलीकाप्टर को क्षतिग्रस्त कर दिया।
-21 फरवरी, 1985 को पुलिस मुठभेड़ में राजा मान सिंह व दो अन्य की मृत्यु हो गई।
-22 फरवरी, राजा मान सिंह के अंतिम संस्कार के वक्त आगजनी व तोडफोड़ हुई। इसमें भी पुलिस फायङ्क्षरग में तीन लोगों की मृत्यु हुई।
-28 फरवरी 1985 को सीबीआइ जांच के लिए नोटीफिकेशन हो गया।
-17 जुलाई, 1985 को सीबीआइ ने जयपुर सीबीआइ कोर्ट में चार्जशीट पेश की।
-61 गवाह अब तक अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश किए गए, जबकि 17 गवाह बचाव पक्ष ने अपनी ओर से अदालत में प्रस्तुत किए।
-1700 से अधिक तारीखें अब तक मुकदमे में पड़ चुकी हैैं।
एक परिचयः राजा मान सिंह
भरतपुर रियासत के महाराज किशन सिंह के घर राजा मान सिंह का जन्म पांच दिसंबर, 1921 को हुआ था। इंग्लैंड में वर्ष 1928 से 1942 तक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। दीपा उर्फ कृष्णेंद्र कौर उनकी तीन बेटियों में सबसे बड़ी हैं। 1946-1947 भरतपुर रियासत के मंत्री रहे थे। वर्ष 1947 में उन्होंने रियासत का झंडा उतारने का विरोध किया। 1952 में विधान सभा का पहला निर्दलीय चुनाव जीता। इसके बाद लगातार वह सात बार निर्दलीय विधायक चुने गए।
आज जो फैसाल हुआ है बहुत अच्छा फैसला हुआ है। स्व.राजा मान सिंह और हरी सिंह को न्याय मिला है। मथुरा और भरतपुर जिले के लोगों को भी खुशी है, इतने दिन बाद मामले में फैसला आ गया है।
-दीपा कुमारी
घटना से 35 साल फैसला आया है जिसमें 14 पुलिसकर्मियों से 11 पुलिसकर्मी दोषी हैं और तीन पुलिसकर्मी बरी कर दिए हैं जो जीडी में बदलाव के दोषी थे। 11 पुलिसकर्मियों की सजा जिला जज सुधारानी सुनायेंगी
-नारायण सिंह अधिवक्ता, दीपिका रानी पक्ष













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