देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकिस्मत लेकर आना और कर्म लेकर जाना बस इसी का नाम ज़िंदगी है। इसलिए तो कहता हुं अच्छे तन से मन से और शुद्ध जीव आत्मा द्वारा ईश्वर ने जिस कार्य के लिए इस धरा पे भेजा है उसे करो। आगे आप सभी काफी समझदार लोग है। क्योंकि लौटे के इस भोग भूमि पे आना है। क्या क्या बनके क्योंकि कर्म पीछा नहीं छोड़ते। वो लौटे के जरूर मिलते है चाहे कितने भी पुनः कर्म कर लो कुछ भी कर लो भोगना तो १००० परसेंट पड़ेगा। क्योंकि सभी दिव्य शक्ति, देवताओं से लेकर ईश्वर तक इस भोग भूमि पे आके गए। तो हम और तुम क्या है। #हरिबोल













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हमारे जीवन की यात्रा में कर्म की भूमिका बहुत बड़ी है