BREAKING NEWS

नेपाल त्रासदी : अब तक 1252 शव बरामद, 95 की हो पाई शिनाख्त, चितवन में सबसे ज्यादा मौतें : जयपुर : शीतला माता की उपासना का पर्व ‘थदड़ी’: सिंधी समाज ने घरों में नहीं जलाया चूल्हा, ठंडे व्यंजनों का लगाया भोग || जयपुर : ग्रामीण राजस्थान को सौगात हर पंचायत पर बनेंगे अटल ज्ञान केंद्र व खेल मैदान, 3,219 किमी सड़कें और किसानों को तारबंदी-डिग्गी का अनुदान || मथुरा : बरसात के बीच छाता लेकर सड़क पर जमे रहे नगर आयुक्त || मथुरा : ठाकुर द्वारकाधीश में 4 को जन्मोत्सव, 5 सितंबर को मनाया जाएगा नंद महोत्सव || मथुरा : 4 सितंबर को निकलेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शोभायात्रा

पानी का संकटः बगैर अनुमति बोरिंग करना अब पूर्णतः अवैध घोषित

मथुरा। भू गर्भीय जल के लगातार नीचे खिसकने हालात चिंता जनक हो गये हैं। सरकार की ओर से इस बात के प्रयास किये जा रहे हैं कि जमीन से जल का कम से कम दोहन हो। इसके लिए अब बिना अनुमति के बोरिंग करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।


उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल संरक्षण परिषद की बैठक में बोर्ड के समक्ष बोरिंग के किए गए ऑनलाइन आवेदनों पर विचार किया गया। कुछ आवेदन स्वीकृत कर बोरिंग के लिए अनुमति दी गई जबकि कुछ को रद्द कर दिया गया। बोर्ड ने बगैर अनुमति किये गये बोरिंग को अवैध करार देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।


जिला विकास अधिकारी रवि किशोर त्रिवेदी की अध्यक्षता में कलेक्टेªट सभागार में उत्तर प्रदेश भू जल संरक्षण परिषद की बैठक हुई। सचिव रवि किशोर त्रिवेदी ने बैठक मे भूगर्भ जल संरक्षण परिषद के नोडल अधिकारी व सहायक अभियंता लघु सिंचाई हरिओम सिंह ने बताया कि जमीन में से पानी के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में जो भू जल संरक्षण कानून बनाया है, उसके प्रावधानों के तहत अब सख्त कदम उठाए जाएंगे। बूंद बूंद पानी को बचाया जाएगा। सबसे पहले अत्यधिक दोहन करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर अंकुश लगाया जाएगा। जिले के उन सभी उद्योगों को जो जमीन में से पानी खींच रहे हैं, को पानी की ऑडिट करानी होगी।


बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि दो सप्ताह के अंदर समस्त औद्योगिक इकाइयों को नोटिस भेजकर उनसे पूछा जाएगा कि वह कितना भूजल खींच रहे हैं? उसका भुगतान कितना किया है? जिन्होंने भूजल टैक्स नहीं दिया है, उनसे भुगतान करा लिया जाएगा। इसमें उद्योग उपायुक्त की भी मदद ली जाएगी।


बैठक में सहायक नगर आयुक्त सत्येंद्र तिवारी ने नये भूजल एक्ट की प्रति मांगी। साथ ही कहा कि नगर निगम का जो दायित्व है, वह उसे पूरा करेगा। जहां बोरिंग कराए जा रहे हैं, उनकी चेकिंग की यदि जिम्मेदारी ह,ै तो उसे वह पूरा कर आएंगे। बैठक में जन सहयोग समूह के भूजल प्रकल्प प्रभारी और बोर्ड के गैर सरकारी सदस्य चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने भूजल की बर्बादी रोकने के लिए गैर जरूरी बोरिंग रोकने का सुझाव दिया।

उन्होंने बताया कि नये एक्ट में जन जागरूकता बहुत जरूरी है। लोगों को बताया जाए कि बोर्ड की स्वीकृति पर ही अब बोरिंग हो सकेगा। शहरों में समरसेबिल और देहात में नलकूप बोरिंग हो रहे है लेकिन वर्षा का पानी बचाने को कोई नहीं सोच रहा। अतः सभी लोग रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं। जन सहयोग समूह के कन्वीनर अजय कुमार अग्रवाल ने भी सुझाव दिये।

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

वह खौफनाक रात हमारा पीछा कर रही है

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More