देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकोई न कोई समस्याएं हमे सीखा के जाती है...महामारी जब शुरू हुयी थी...तब सभी लोगों के अलग-अलग मत थे...धीरे-धीरे समय निकला लोगों के विचार बदलें आखिर हम ढल गएँ...अपनी बात पे...एक वक़्त था एक महीने पहले का शोर सरावा चारो तरफ एक जैसा मैदानों से पहाड़ों तक सब एक जैसा...आज ऑफिस पे बैठे के लगा की किसी बगीचे में बैठे है इतने पक्षी कहाँ से आएं...अगर ये कुछ महीने पहले थे तो अब कहाँ से आएं ... और अब निकलें तो कहाँ से निकले....आखिर हुआ क्या ऐसा सब बदल गया..समझने के लिए बहुत कुछ और समझाना होगा....किसी को ये पता नहीं था क्या होने वाला है और अचानक एक सुबह पता लगा की सब बंद हो रहा है.....2020 के बारे में अलग-अलग मत है... महामारी आती रहेंगी पर कोई बुरा प्रभाव कुछ सीखा के जाता है...इसलिए विचारों को आगे बढ़ाएं....प्रकृति अपने सुंदरता निकाल रही हैं...मई 2020 चल रही है गर्मी का प्रभाव उतना नहीं जितना हुआ करता था...जब-जब संतुलन बिगड़ता है...प्रकति अपने आप स्वतहि अपना बैलेंस कर लेती है......लोगों द्वारा बनायी हुयी सीमा रेखा के परे बहुत कुछ है.... इसलिए संतुलन में रहिये....सब अच्छा होगा.........जय श्रीकृष्ण












