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’ऑस्ट्रेलियाः जब धरती ने सोना उगला’ पर हुई साहित्यक चर्चा

मथुरा। एक अरसेे बाद मथुरा में एक किताब के प्रकाशन पर शानदार जलसा हुआ। एक छोटे शहर में सिनेमा, टीवी और उथली हो चुकी राजनीति पर चर्चा की खबरें आती ही रहती है लेकिन मथुरा में एक किताब पर गंभीर चर्चा की बैठक एक अरसे बाद हुई।
कुदरत की पृथ्वी पर शादार भेंट ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप पर छपी किताब ’ऑस्ट्रेलियाः जब धरती ने सोना उगला’ पर चर्चा में शहर के तमाम बुद्धिजीवियों की शिरकत देख लगा कि मथुरा का स्वरूप सिर्फ धार्मिक ही नहीं, साहित्यिक भी है।
एक वक्त था जब सामान्य लोग वक्त गुजारने की नीयत से अपने सफर में रेलवे प्लेटफार्म से पुस्तकें और पत्रिकाएं लेकर पढ़ा करते थे। अब सब कुछ गायब है, पुस्तकंे गायब हैं घरों से। ऐसे में परायी घरती के इतिहास को जानने की ललक देख पुस्तक का लेखक हतप्रभ लेकिन प्रसन्न भी था। माधव मुस्कार होटल में आयोजित कार्यक्रम में यात्रावृतांत और संस्मरण को बेहद रोचक शैली में प्रस्तुत करने के महारथी डा. अशोक बंसल की पुस्तक के विमोचन में खचाखच भरे हल का दृश्य देख लगता था कि मथुरा के प्रबुद्ध अब किसी महानगर कि तरह अब साहित्यिक विषयों पर बतियाने को आतुर हैं।
पुस्तक विमोचन की कामयाबी की एक वजह यह भी रही कि मुख्य वक्त पत्रकार और कवि हृदय प्रताप सोमवंशी, आगरा विवि के पूर्व कुलपति डा. गिरीश सक्सेना और डा. हरिवंश चतुर्वेदी ने पुस्तक के मजमून को भलीभांति जान लिया था  प्रायः देखा गया है वक्ता सरसरी नजर से पुस्तक को देखकर ही वक्तव्य देते हैं, लेकिन इस विमोचन में रेखंकित करने योग्य बात यह रही कि पुस्तक पर ईमानदार और गंभीर चर्चा हुई। दो घंट के इस कार्यक्रम में मैंने अनुभव किया कि हमारे देश में पिछले दस सालों में मिडिल क्लास की सम्पन्नता बढ़ी है, देशाटन और परदेश भ्रमण की खाहिश पैदा हुई है। इससे साफ जाहिर है कि लोगों में देश दुनिया का राज जानने की ललक भी बढ़ी है। ऐसे में ’ऑस्ट्रेलियाः जब धरती ने सोना उगला’ पुस्तक को पसंद किया जाना लाजमी है। तभी तो आगरा विवि के पूर्व कुलपति डा.गिरीश चंद्र सक्सेना ने कार्यक्रम के दौरा कहा कि लेखक को यात्रा वृतांत के लेखन का सिलसिला बनाये रखना चाहिए। साहित्य की इस विधा के पाठक अनेक हैं।

 

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