देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। धर्म नगरी में इस समय कथावाचकों पर सनातन धर्म की परंपराओं का पालन नहीं करने और मार्यादा को लांघने के आरोप लग रहे हैं। धर्म नगरी में कथावचकों की संख्या अच्छी खासी और इनका प्रभाव भी बहुत है। इस बीच शोसल मीडिया पर लगातार कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। साधु संतों ने इन वीडियो पर आपत्ति जताते हुए ऐसे कथावचकों को चेतावनी दी है जो इस तरह के आरोपों में घिरे हैं।
बैठक में महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहाकि हमारे भारत की सनातन धर्म व संस्कारों वाले ऋषि-मुनियों की तपोभूमि भारत में इस तरह के विधर्मियों द्वारा पथ भ्रष्ट करने की बातें व्यासपीठ से करना सर्वथा अनुचित है। कुछ और भी इस प्रकार के तथाकथित उपाधि धारक राष्ट्रीय संत व्यासपीठ को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जगद्गुरु अनंतानंद द्वाराचार्य, काशी पीठाधीश्वर रामकमल वेदांती महाराज, स्वामी राघवाचार्य महाराज, महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज, स्वामी चतुर्भुजाचार्य महाराज, निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी चित्त प्रकाशानंदज महाराज, पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी महामडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द महाराज, स्वामी रामदेवानंद महाराज, जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर नवलगिरी महाराज तथा काशी विद्वत परिषद पश्चिमांचल भारत के प्रभारी कार्षि्ण नागेंद्र महाराज, डॉ मनोज मोहन शास्त्री, आचार्य बद्रीश, डॉ सच्चिदानंद द्विवेदी, अशोक व्यास, विमल चैतन्य, आनन्द बल्लभ गोस्वामी, पुरुषोत्तम शरण शास्त्री, विपिन बापू, निरंजनी अखाड़ा के महंत स्वामी आदित्यानंद महाराज, महन्त रामस्वरूप दास, डॉ स्वामी सत्यमित्रानंद, डॉ हरी मोहन गोस्वामी, आचार्य राधा रमण गोस्वामी, प्रियाशरण भक्तमालि सहित देश के तमाम संत अखाड़ा परिषद के लोगों ने इस तरह के व्यासों को तत्काल व्यासपीठ से मुक्त करने की बात उठाई। परिषद के प्रभारी नागेन्द्र महाराज ने कहा कि काशी में राष्ट्रीय पदाधिकारियों से बात हुई है श्री काशी विद्वत परिषद इन सभी संदर्भों को देखते हुए शीघ्र बैठक करने जा रही है।













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