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किसानों की आमदनी बढ़ाने को विकास खण्ड स्तर तक कमेटी बनायी जायेः सीडीओ

मथुरा। किसान की आय जो थी वह भी नहीं रही, ऊपर से जले पर नमक यह कि हर हाल में किसान की आय दोगुनी करके छोडेंगे। इसके लिए तमाम गड़ित भी भिड़ाये जा रहे हैं और योजनाएं भी बनाई जा रही हैं। जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। वास्तविकता को देखने और समझने का समय न अधिकारियों के पास है और नहीं जनप्रतिनिधियों के पास। सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए पशुपालन पर विशेष जोर दे रही है। कोरोना ने किसानों की कमर तोड कर रख दी है। खास कर पशुपानल कर ने वाले किसानों की। गांव में भैंस का दूध 35 रूपये प्रतिलीटर बिक रहा है और गाय का 30 रूपये लीटर। बाजरा का समर्थन मूल्य सरकार ने 2200 रूपये कुंतल तय किया था लेकिन मथुरा और कोसीकला मंडी में 1200 प्रतिकुंतल के भाव में आढतिया खरीदने को तैयार नहीं हैं। अगर क्वालिटी बहुत अच्छी है तो 1200 रूपये कुंतल का भाव मिल जाएगा।

 

प्रगतिशील किसान प्रथ्वी सिंह का कहना है कि नीति नियंताओं को हकीकत को समझना होगा। अधिकारियों को कार्यालय से बाहर निकलना होगा तब कहीं जाकर किसानों को कुछ राहत मिल सकती है। कृष्क बुद्धा सिंह कहते हैं कि बाजार पूरा खेल खेल रहा है। जो बाजार के खिलाडी हैं वह मुनाफा कमा रहे हैं। प्रशासन को इनके उपर कार्रवाही करनी चाहिए। सरकार जो समर्थन मूल्य घोषित कर रही है उस पर खरीद भी हो। किसान उदयवीर सिंह कहते हैं कि बिचैलिये पूरा लाभ ले जाते हैं। अधिकारी कार्यालयों से बाहर नहीं निकल रहे। ऐसे में किसी योजना का कोई लाभ किसान को मिलेगा इस बात की उम्मीद बेहद कम है।


मुख्य विकास अधिकारी नितिन गौड़ ने राजीव भवन सभागार में पांच अगस्त नावार्ड की बैठक लेते हुए  को उन्होंने निर्देश दिये कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए नये शासनादेश के अनुसार कार्य किया जाये। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर एक कमेटी का गठन किया जाये। तत्पश्चात कमेटियों को गठन विकास खण्ड एवं ग्राम स्तर पर किया जाये, जिसमें किसानों को मुनाफे वाली फसलों के संबंध में जानकारी दी जाये।


सीडीओ ने कहा कि किसानों का एक क्लस्टर बनाया जाये, जिसमें 300 किसानों को शामिल किया जाये और किसानों को अधिक लाभ देने वाली फसलों के संबंध में विशेष जानकारी दी जाये। उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी को दुगुनी करने के लिए खेती के साथ-साथ पशु पालन एवं ग्रामीण उद्योग लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाये।

उन्होंने कहा कि मथुरा जनपद में सरसों का उत्पादन भी अच्छा होने के कारण इसे भी जनपद के कृषि उत्पादन में विशेष स्थान दिया जाये। उन्होंने कहा कि सरसों ऐसी फसल है, जिसमें तेल, खर एवं लकड़ी की विक्री की जाती है। श्री गौड़ ने निर्देश दिये कि श्रमिकों के लिए पशु पालन एवं मत्स्य पालन जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाये, साथ ही उन्हें लाभान्वित किया जाये। उन्होंने कहा कि इसके लिए विकास खण्ड स्तर पर कैम्प लगाये जायें और प्रत्येक पात्र व्यक्ति को यथासंभव रोजगार उपलब्ध कराया जाये।


 बैठक में उप कृषि निदेशक धुरेन्द्र कुमार, पीडी बलराम सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी प्रतीम सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. योगेन्द्र सिंह पवार, सहायक निदेशक मत्स्य महेश चैहान सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित थे।

सीडीओ साहब सिर्फ योजना न गिनाओ, कुछ करो भी...
किसानों पर कोरोना कहर बन कर टूटा है। कोरोना के असर से दूध का कारोबार धराशाई हो गया है। हालांकि बाजार में दूध के दामों में गिरावट नहीं है। लाखों लाख लीटर दूध खरीदने वाले प्लांट संचालक मनमाने तरीके से दूध खरीद रहे हैं। फुल क्रीम दूध की खरीद जहां 35 रूपये लीटर हो रही है वहीं आम डेयरियों पर इसे 50 से 52 और फुटकर में डोर टू डोर 60 रूपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है। गोवर्धन रोड स्थित डेयरी संचालक कहते हैं, क्या होगा भगवान ही मालिक है। लम्बे समय से डेयरी का काम कर रहे हैं, इतनी भयंकर गिरावट कभी नहीं देखी। लाॅकडाउन में दूध के दाम एक दम से गिरे थे। इसे बाद सब कुल अनलाॅक हो गया है लेकिन किसान को उसी कीमत में सस्ते में दूध बेचना पड रहा है। सब मुनाफा बिचैलिया की जेब में जा रहा है।

यूरिया को ऊंची कीमतों पर खरीदने को मजबूर किसान
यूरिया को किसान ऊंची कीमतों पर खरीदने को मजबूर हैं। यूरिया बाजार में नहीं है। किसान को वाजिब मूल्य पर मिल नहीं रहा लेकिन ऊंची कीमत पर यूरिया की भरमार है जितना चाहें खरीद सकते हैं। 280 रूपये का यूरिया का कट्टा 300 और 320 रूपये में मिल रहा है। अभी तक जिला प्रशासन ने इस बात का संज्ञान नहीं लिया है कि यह असंतुलन कैसे पैदा हुआ। कहीं किसी तरह की छापे मारी भी नहीं हुई है। कांग्रेसियों ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर ज्ञापन भी सौंपा था।

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