देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के कथित नक्सल लिंक के मामले में सुनवाई के दौरान पुणे पुलिस को जबर्दस्त फटकार लगाई गई। साथ ही यह आदेश दिए गए है कि इस मामले की अगली सुनवाई 12 सितम्बर को होगी। इस दौरान तक कोर्ट ने आरोपियों के हाउस अरेस्ट को जारी रखने के निर्देश दिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने पुणे पुलिस को आडे हाथ लेते हुए कहा कि पुलिस ने कैसे कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि पुलिस ने मीडिया को सबूत दिखाकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को गलत साबित करने का प्रयास किया गया है।
इसके लिए कोर्ट ने सरकारी वकील से कहा कि पुलिस को इन बातों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मामला न्यायालय में विचारधीन है तो मीडिया कांफ्रेंस करने की क्या आवश्यकता पड गई। साथ ही चेताया कि हम इस मामले में बहुत गंभीर हैं। न्यायालय में सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता और सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि इस मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग की। भीमा कोरेगांव मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन होना ही चाहिए।
सरकार की तरफ से पेश हुए तुषार मेहता ने कहा कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए। उल्लेख है कि पिछले हफ्ते मंगलवार को महाराष्ट्र पुलिस ने ऐक्टिविस्ट सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, अरुण फरेरा, तेलुगू कवि वरवरा राव और वेरनॉन गोन्साल्वेज को गिरफ्तार किया था। इनपर अनलॉफुल ऐक्टिविटीज प्रिवेंशन ऐक्ट की धाराएं लगाई गई थीं।
साभार-khaskhabar.com













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