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नई दिल्ली। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने गुरुवार को भारतीय सेना के लिए अमेरिका से छह अपाचे जंगी हेलीकॉप्टर खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इन छह अपाचे जंगी हेलीकॉप्टरों की खरीद पर कुल 4,168 करोड़ का खर्च आएगा। चीन के साथ सिक्किम के डोकलाम को लेकर जारी तनातनी के बीच इस मंजूरी को काफी अहम माना जा रहा है। रक्षा मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद की बैठक में यह मंजूरी प्रदान की गई। भारत इस एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर के साथ अमेरिका से संबद्ध उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, प्रशिक्षण एवं गोला-बारूद भी लेगा। डीएसी ने इसके अलावा यूक्रेन से दो गैस टर्बाइन सेट भी खरीदने को मंजूरी दे दी। ये गैस टर्बाइन सेट रूस में भारत के लिए तैयार किए जा रहे दो ग्रिगोरोविच पोतों के लिए खरीदे जाएंगे। इन गैस टर्बाइन सेट की कीमत 490 करोड़ रुपये होगी।
2015 में अमेरिकी कंपनी बोइंग से 22 अपाचे हेलिकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी गई थी। ये हेलिकॉप्टर वायुसेना को दिए गए थे। इस सौदे के प्रावधानों के तहत 11 और हेलिकॉप्टर खरीदे जा सकते थे। इसी के तहत भारतीय सेना ने अपने लिए हेलिकॉप्टरों की मांग की थी। सेना के पास अब तक बिना हथियार वाले हेलिकॉप्टर रहे हैं। अब वह हथियारबंद हेलीकॉप्टर चाहती है। अपाचे हेलीकॉप्टर मिसाइल और रेडार से लैस होते हैं। इसके अलावा रक्षा खरीद परिषद ने नौसेना के युद्धपोतों के लिए यूक्रेन से 490 करोड़ रुपये की लागत से दो गैस टर्बाइन इंजन खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। आपको बता दें कि पिछले साल गोवा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच हुई शिखर वार्ता के दौरान भारत ने रूस से 4 ग्रिगोरोविच क्लास के युद्धपोत खरीदने को मंजूरी दी थी। ग्रिगोरोविच क्लास के युद्धपोत पर ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती की जा सकती है। इनमें से दो युद्धपोतों का निर्माण भारत रूस में किया जा रहा है जबकि दो का निर्माण भारत में किया जाएगा। रूस में इन युद्धपोतों के निर्माण का काम अभी अधूरा पड़ा है। बताया जा रहा है कि नकद की कमी और यूक्रेन के साथ द्विपक्षीय समस्याओं के चलते काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। बाकी दो युद्धपोतों का निर्माण गोवा में किया जाएगा। यूक्रेन से इन टर्बाइन्स को खरीदने के बाद भारत उन्हें रूस को भेजेगा।
साभार-khaskhabar.com













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