BREAKING NEWS

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

भारत ने 34 साल पहले आज ही के दिन जीता था पहली बार विश्व कप

भारत ने 34 साल पहले आज ही के दिन जीता था पहली बार विश्व कपनई दिल्ली । महान ऑलराउंडर कपिल देव के नेतृत्व में भारत ने आज से ठीक 34 साल पहले पहली बार वनडे विश्व कप का खिताब अपनी झोली में डाला था। भारतीय टीम ने 25 जून 1983 को लॉड्र्स में दो बार के चैंपियन वेस्टइंडीज को फाइनल में 43 रन से हराया था। वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लॉयड ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्यौता दिया। 

60-60 के ओवर के इस मुकाबले भारतीय टीम 54.4 ओवर में 183 रन पर ही ढेर हो गई। सुनील गावस्कर केवल दो रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद कृष्णामाचारी श्रीकांत (38) और मोहिंदर अमरनाथ (26) ने दूसरे विकेट के लिए 57 रन जोड़े। श्रीकांत केपैवेलियन लौटने के साथ ही भारत के विकटों की झड़ी लग गई।

बाद में संदीप पाटिल ने 27, मदन लाल ने 17, कपिल ने 15 और विकेटकीपर सैयद किरमानी ने 14, यशपाल शर्मा व बलविंदर सिंह संधू ने 11-11 रन का योगदान दिया। जोएल गार्नर ने चार, एंडी रॉबट्र्स ने तीन, माइकल होल्डिंग ने दो और मैल्कम मार्शल व लैरी गोम्स ने 1-1 विकेट लिया। जवाब में इंडीज की टीम 52 ओवर में 140 रन पर ही सिमट गई। विव रिचड्र्स ने सर्वाधिक 33 रन बनाए। विकेटकीपर जैफ डुजोन ने 25, मार्शल ने 18 और डेसमंड हेंस ने 13 रन की पारी खेली। अन्य सात बल्लेबाज दोहरे अंक में भी नहीं पहुंच पाए। मोहिंदर अमरनाथ व मदनलाल ने 3-3, संधू ने दो और कपिल व रोजर बिन्नी ने 1-1 विकेट चटकाया। अमरनाथ को उनके हरफनमौला खेल के लिए मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला।  

साभार-khaskhabar.com

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको  ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

Read More