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23 से बढ़कर 49 हुए गंगा में गिरने वाले नाले, नमामि गंगे परियोजना "स्वाहा"

23 से बढ़कर 49 हुए गंगा में गिरने वाले नाले, नमामि गंगे परियोजना वाराणसी । 25 हजार करोड़ रुपये की नमामि गंगे परियोजना को पलीता लगा दिया गया है। जिस दशाश्वमेध घाट पर डुबकी लगाने से दस अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलने का महात्म्य है, वहां अब बजबजाते नाले की धार से दुर्गंध उठ रही है। पहले से गंगा में गिरने वाले 23 नालों की संख्या बढ़कर अब 49 हो गई है। काहिली की हद तो यह है कि घाट से लेकर शहर तक का कूड़ा निस्तारण भी चोरी छिपे गंगा पार रेती पर या फिर किनारों पर ही करा के निगम के अफसर कर्तव्यों की इतिश्री कर ले रहे हैं। इसी पखवारे मकर संक्रांति पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का रेला गंगा में मकर स्नान के लिए उमड़ेगा और पुण्य का गोता उसी नाले के ठहरे पानी में करने के लिए तीर्थयात्री मजबूर होंगे। काशी में गंगा निर्मलीकरण के लिए केंद्र सरकार ने जितनी दवा की, प्रदूषण की बीमारी उतनी ही बढ़ती जा रही है। 

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सीवेज पंपिंग स्टेशन, कूड़ा निस्तारण और नालों को बंद करने के नाम पर काशी में दो हजार करोड़ रुपये से अधिक पहले ही खर्च हो चुके हैं। अब नमामि गंगे परियोजना लागू होने के बाद नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की ओर से एक बूंद भी गंदा पानी गंगा में न जाने देने की हिदायत तो दी गई लेकिन इसका नतीजा शून्य ही रहा।

पहले से बह रहे 23 नालों को तो बंद नहीं किया जा सका, अलबत्ता अब 49 नाले गंगा में बहने लगे हैं। राजमंदिर, सिंधिया घाट, मणिकर्णिका घाट, जलासेन घाट, कंगन की हवेली, भोसले घाट, त्रिलोचन घाट, मानसरोवर घाट, शिवाला घाट से भी नाले गंगा में बहने लगे हैं। गंगा सेवा अभियान के सर्वेक्षण में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। जलकल विभाग की 150 एमएलडी की प्रतिदिन जलापूर्ति के अलावा निजी बोरिंग, हैंडपंपों, कुओं और बोतल बंद मिनरल वाटर को लेकर कुल 400 एमएलडी पानी का शहर की 20 लाख आबादी पर प्रतिदिन खर्च है। यह पानी तो घरेलू डिस्चार्ज के रूप में इन नालों से सीधे गंगा में बहाया ही जा रहा है। इसके अलावा रामनगर और बनारस के औद्योगिक नालों से भी 200 एमएलडी कचरायुक्त गंदा पानी गंगा में बहाया जा रहा है। कुल 600 एमएलडी यानी 60 करोड़ लीटर गंदे पानी का भार रोज गंगा वहन कर रही है। इसके अलावा मानव और पशुओं की लावारिस लाशों और श्मशान घाट की राखों को भी धड़ल्ले से गंगा में बहाया जा रहा है।  इससे गंगा के अस्तित्व पर संकट खड़ा होने के साथ ही यहां दूर-दूर से पुण्य की डुबकी लगाने आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत उत्पन्न हो गई है।

साभार-khaskhabar.com

 

नारद संवाद

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