देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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पणजी। रक्षामंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद गोवा के मुख्यमंत्री बने भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर ने गुरुवार को सदन के पटल पर अपना बहुमत साबित कर दिया है। पर्रिकर सरकार के पक्ष में 22 मत पड़े जबकि विपक्ष में 16 विधायकों ने वोट डाले हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार गुरुवार को ही विधानसभा में बहुमत साबित करना था। राज्य में भाजपा के बहुमत से काफी पीछे रह जाने के बाद राज्यपाल के फैसले के मुताबिक, पर्रिकर ने मंगलवार को चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। राज्य की 40 सदस्यीय विधानसभा में 13 सीटें हासिल करने वाली भाजपा ने अन्य दलों के सहयोग से बहुमत के लिए जरूरी 21 विधायकों का आंकड़ा पार कर लिया। गोवा फारवर्ड पार्टी और एमजीपी ने पर्रिकर सरकार को समर्थन का ऐलान किया है।
शक्ति परिक्षण को देखते हुए कांग्रेस खेमे में भी हलचल है। वोटिंग से पहले कांग्रेस के नाराज विधायक विश्वजीत राणे ने 5 युवा विधायकों के साथ बैठक की। यह बैठक एक होटल में हुई। विश्वजीत कुछ कांग्रेस नेताओं से नाराज हैं और वह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी मिलकर इनकी शिकायत कर सकते हैं।
कांग्रेस का आरोप- 1,000 करोड़ में खरीदे गए विधायक
उधर, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गैर कांग्रेसी विधायकों को लुभाने और खरीद-फरोख्त पर भाजपा ने इस सप्ताह गोवा में 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव गिरीश चोडनकर ने पणजी से 2 बार विधायक निर्वाचित हुए सिद्धार्थ कुनकोलिनकर को गोवा विधानसभा का अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि कुनकोलिनकर की निष्पक्षता संदेहास्पद है, क्योंकि वह 2012-2014 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के राजनीतिक सहायक और संयुक्त सचिव के रूप में काम कर चुके हैं। चोडनकर ने कहा है कि भाजपा ने विधायकों को खरीदने के लिए 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए। इस बयान के बाद भाजपा महासचिव ने कहा कि मुझे तो 1,000 करोड़ रुपये लिखने तक नहीं आता, मेरे पास एक छोटी-सी कार है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फ्लोर टेस्ट राज्यपाल ने पर्रिकर सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पर्रिकर को आज ही बहुमत साबित करना होगा।
कम सीटों के बावजूद भाजपा की सरकार
चालीस सदस्यीय गोवा विधानसभा में 17 सीटें जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ा दल है। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया था कि उन्हें सरकार गठन का पहले मौका मिलना चाहिए था। कांग्रेस इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गई थी और कहा था कि इससे विधायकों की खरीद-फरोख्त हो सकती है। कोर्ट ने कांग्रेस को फटकार लगाते हुए कहा था कि पहले उन्हें संख्याबल के साथ गवर्नर के पास जाना चाहिए था। हालांकि अदालत ने पर्रिकर सरकार को 15 दिन की बजाय 16 मार्च को बहुमत साबित करने का भी निर्देश दिया था।
साभार-khaskhabar.com













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