देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकोरोना महामारी ने बीते करीब 2 साल में हमें बहुत कुछ सिखाया है। इस महामारी ने हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था में नीतिगत रूप से भी बदलाव करने का संकेत दिया। हमें सिखाया कि देश में जिला स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ होना बेहद जरूरी है। अब कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच आयुष विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भारत सरकार ने भविष्य में आयुष पद्धति पर होने वाले इलाज के लिए पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की योजना बनाई है। इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रीय आयुष मिशन को 2026 तक जारी रखने का फैसला किया गया। इसके अंतर्गत कॉलेज, पीजीआई और वेलनेस सेंटर बनाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि सरकार इस मिशन पर 4607 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।
वेलनेस सेंटर और कॉलेज की बढ़ाई जाएगी संख्या
दरअसल, कोरोना महामारी में आयुष मंत्रालय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय आयुष मिशन को 2021-22 से लेकर 2025-26 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत अगले 5 वर्षों में 4,607 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें बीमारियों से बचाव के उपायों पर फोकस किया जाएगा और साथ में लोगों के बीच इनका प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि देशभर में 12,000 आयुष हेल्थ वेलनेस सेंटर खोले जाएंगे। इसके साथ 6 आयुष कॉलेज खोले जाएंगे और 12 पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट खोले जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि देशभर में 10 अंडर ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट के इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किए जाएंगे। 50 बेड के, 30 बेड के और 10 बेड के नए 36 अस्पतालों का निर्माण किया जाएगा और 101 अस्पताल 50 बेड वाले, जो अभी चल रहे हैं उनके आधारभूत ढांचे यानि इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जाएगा। वहीं, 152 आयुष डिस्पेंसरी को भी अपग्रेड किया जाएगा। इसका उद्देश्य, बीमारियों की रोकथाम करना और हेल्थ सिस्टम पर बीमारी का भार कम करना है।
आयुर्वेद के साथ किया जायेगा रिसर्च पर फोकस
नए फैसले के चलते अरुणाचल प्रदेश स्थित आयुष मंत्रालय के नॉर्थ ईस्टर्न इंस्टिट्यूट ऑफ फोक मेडिसिन (एनईआईएफएम) में बदलाव किया गया है। अब यह नार्थ ईस्टर्न इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड फोक मेडिसिन रिसर्च होगा। इसमें आयुर्वेद को भी जोड़ा गया है और इससे ट्रांस-हिमालयन रीजन यानि उत्तर भारत के, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड पूर्वोत्तर तक के राज्यों तक जो मेडिसिनल वैल्यू है, उनपर रिसर्च को बल मिलेगा।
लोगों ने भारतीय चिकित्सा प्रणाली पर जताया भरोसा
जब से कोरोना काल शुरू हुआ है तभी से कोरोना से बचाव और इलाज में आयुष विभाग ने अहम भूमिका निभाई है। इस दौरान जहां लोगों को कोरोना की भारी-भारी दवाई खानी पड़ी, वहीं आयुष मंत्रालय ने लोगों को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए अंग्रेजी इलाज की पद्धति के अलावा भारतीय चिकित्सा प्रणाली के बारे में बताया। इसमें आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी की चिकित्सा पद्धति में उपयोग में लाई जाने वाली दवाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इसके साथ, लक्षण और निवारण के बारे में भी लोगों को सोशल मीडिया और अन्य तरीकों से जानकारी दी गई।
आयुष विभाग ने कई आयुर्वेदिक दवाओं के प्रचलन को बढ़ावा दिया। इसका निष्कर्ष ये निकला कि लोगों के बीच आयुष-64 जैसी दवाएं काफी मशहूर हुईं और इसका बढ़-चढ़कर इस्तेमाल किया गया। लोगों के अंदर ये विश्वास जगा कि जड़ी-बूटियों से भी कोरोना जैसी घातक बीमारी का खात्मा किया जा सकता है।













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