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राजस्थान विस चुनाव -लाभार्थी तय करेंगे सीएम वसुंधरा राजे का भविष्य !

राजस्थान विस चुनाव -लाभार्थी तय करेंगे सीएम वसुंधरा राजे का भविष्य !जयपुर । राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 7 दिसंबर को मतदान के दिन प्रदेश की लाभार्थी जनता सीएम वसुंधरा राजे का आगे का भविष्य तय करेगी। जी हां, इस बार राजस्थान में अलग ही मतदाताओं का वर्ग खड़ा हुआ है, जो लाभार्थी वर्ग है। सीएम वसुंधरा राजे खुद अपने हस्ताक्षर से युक्त एक शुभकामना संदेश पहले ही प्रदेश के 1 करोड़ 70 लाख से अधिक लाभार्थियों को आचार संहिता लगने से पहले भेज चुकी थी। वहीं इसके बाद भाजपा ने 51 हजार बूथों पर सिर्फ लाभार्थी परिवारों के घर-घर जाकर भाजपा के पक्ष में वोट और समर्थन मांगा है। खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी लाभार्थी परिवारों के भरोसे है। 

उम्मीद है कि लाभार्थी परिवार जरूर भाजपा के पक्ष में वोट करेंगे। इससे पहले जयपुर में पीएम-लाभार्थी जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित हो चुका था, वहीं बाद में राजधानी जयपुर में अलग-अलग लाभार्थी सम्मेलन हुए थे। लेकिन यह भी माना जा रहा कि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने अपने कार्यकाल में जनकल्याणकारी योजनाएं जैसे मुख्य रूप से बात करें, तो निशुल्क दवा योजना लॉन्च की थी। लेकिन कांग्रेस पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। इसके चलते इस बार लाभार्थी वर्ग, जिसे पीएम मोदी और सीएम राजे ने मान्यता दी है, सम्मान दिया है, इस वर्ग की परीक्षा की घड़ी है, यह वर्ग किसके साथ जाता है, योजनाओं का लाभ पहुंचाने वाली सरकार के साथ, या नई सरकार के साथ। जैसा की राजस्थान में परिपाटी रही कि एक बार कांग्रेस एक बार भाजपा। 

इस विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के चुनाव प्रचार की बात की जाए, तो चुनाव प्रचार के दौरान राजस्थान से जुड़े मुद्दे तो नहीं के बराबर रहे। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. सीपी जोशी ने जैसे ही पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती की जाति पर सवाल खड़े किए, तो भाजपा आक्रामक हो गई। साथ ही राममंदिर का मुद्दा भी छाया रहा। इसके अलावा जैसे ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पुष्कर गए, तो गोत्र का मुद्दा उठ गया। इस पर भी राजनीति शुरू हो गई। 

साथ ही कांग्रेस हो,या भाजपा के स्टार प्रचारक, सभी के चुनावी भाषणों में राममंदिर, भगवान हनुमान, गोत्र, जाति ही छाई रही। दोनों के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने लोकसभा चुनाव की तरह चुनाव प्रचार किया। अगर पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुनावी जनसभाओं की बात करें, तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बराबरी नहीं कर सके। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने ताबड़तोड़ चुनावी जनसभाएं की। लेकिन पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की तरह चुनावी भीड़ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नहीं जुटा सके। राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा संसाधनों के बलबूते चुनाव प्रचार में आगे रही। साथ ही घोषणा पत्र जारी करने में भी भाजपा ने पहले बाजी मारी। अगर रोजगार के मुद्दे की बात करें, तो भाजपा ने 50 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर देने की बात कही। साथ ही सभी समाजों का ध्यान रखते हुए विभिन्न आयोग, बोर्ड बनाने की घोषणा की। वहीं कांग्रेस का घोषणा पत्र, जिसे जन घोषणा पत्र नाम दिया है। इस घोषणा पत्र में किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा मुख्य रहा। 

राजस्थान विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से पहले कांग्रेस पार्टी की एक तरफा जीत मानी जा रही थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी के टिकट वितरण के बाद सामने आई बगावत के चलते कांग्रेस के सारे समीकरण बिगड़ गए है। वहीं भाजपा ने इसके बाद काफी इम्प्रूव किया है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने, तो कांग्रेस पार्टी जीत तो रही है, लेकिन अब भाजपा भी शर्मनाक हार से बच सकेगी। 

वहीं कांग्रेस और भाजपा का खेल निर्दलीयों ने बिगाड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। माना जा रहा है कि कम से कम 199 सीटों में से 20 सीटों पर निर्दलीय और अन्य दलों की प्रत्याशी जीत सकते। वहीं चुनाव प्रचार के दौरान खास बात यह रही कि कांग्रेस प्रत्याशी रघु शर्मा, डॉ. सीपी जोशी, मानवेंद्र सिंह, रामेश्वर डूडी, बीड़ी कल्ला, समेत तमाम दिग्गज अपने क्षेत्र से बाहर नहीं निकल सके। यही हाल भाजपा का दिग्गज नेताओं का रहा। भाजपा के गुलाबचंद कटारिया, राजेंद्र सिंह राठौड़, युनूस खान, समेत तमाम दिग्गज अपनी ही सीट पर फंसे रहे।

 

साभार-khaskhabar.com

नारद संवाद

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