देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा। यह आनंद शर्मा हैं, गार्गी के पिता... 15 साल की वह मासूम गार्गी जिसकी आंखों में बहुत से सुनहरे सपने सजे हुए थेे, जो ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ती थी और अपने मम्मी पापा व भाई की लाड़ली थी। वह गार्गी जो सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई, डॉक्टरों की कड़ी मेहनत के बाद भी जिसे बचाया नहीं जा सका लेकिन वह गार्गी मर कर भी जिंदा है क्योंकि उसके पापा आनंद शर्मा ने अपनी बेटी की मृत्यु के बाद उसकी सुनहरे सपना े से सजी ओखें दान करने की पेशकश की। आज उसी गार्गी की दान की हुई आंखों से दो लोगों की जिंदगी का सूनापन दूर हुआ है, यह कहते हुए नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया जब आगरा निवासी आनंद शर्मा को लेकर स्टेज पर आईं तो ऑडिटोरियम में बैठे हुए सभी लोग खड़े होकर गार्गी और उसके पिता के सम्मान में तालियां बजाने लगे। यह मौका था मृत्यु उपरांत शरीर के अंगदान करने की उस मुहिम से सबको जोड ़ने का जिसे नयति मेडिसिटी ने ऑर्गन डोनेशन इंडिया फाउंडेशन और रोटरी क्लब मुदबिदरी और रोटरी क्लब मथुरा सेंटंल के साथ मिलकर आगे बढ़ाया है। नयति मेडिसिटी की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि मानव जीवन अमूल्य है और यदि मृत्यु के बाद किए गए अंगदान स े किसी मानव की जिंदगी की रक्षा हा े सके तो इससे बड़ा पुण्य इस धरती पर कुछ नहीं है। मृत्यु के पश्चात भी करीब 8 लोगा ें की जान बचा सकते हंै।













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