देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा(सुनील शर्मा) । भाद्रमास शुक्लपक्ष की छटी को ब्रज के राजा और भगवान श्रीकृष्ण के जेष्ठभ्रता शेषनाग अवतार बलदाऊ के जन्मोत्सव की खुमारी में ब्रजवासी झेम उठे। भगवान बलभद्र के जन्मोत्सव का मुख्य कार्यक्रम बल्देव के दाऊजी मंदिर में आयोजित हुआ। ब्रज के सभी मठ-मंदिरों में बलदाऊ का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
बल्देव के दाऊजी मंदिर में 11 दिवसीय बल्देव छट का आयोजन हुआ। भाद्रमास की शुक्लपक्ष की छटी को 11 बजे भगवान बलभद्र का जन्म हुआ और मंदिरों में दोपहर 12 भगवान का अभिषक किया गया। इससे पहले भगवान बलभद्र की लीलाओं का मंचन मंदिर में किया गया। भगवान बलभद्र मल्लविद्या के लिए जाने जाते हैं। दधिकांधा और नारियल की बरसात जन्मोत्सव का मुख्यआकर्षण बने रहे। भगवान बलभद्र बल के देवता माने जाते हैं। मंदरि के पुजारियों ने भक्तों पर दधिकांधा की बरसात के बीच नारियालों की ऐसी लूट मचाई कि मंदिर प्रांगण में नारियल लूट ने के लिए युवक इस कदर जूझे कि पूरा मंदिर प्रांगण मल्लदुद्ध के मैदान में परिवर्तित हो गया। इस अनूठे नयनाभिराम दृश्य को टकटकी लगाये मंत्र मुग्ध होकर भक्ता निहारते रहे। शाम को नगर में शोभायात्रा निकाली गई। इससे पहले पदमश्री से सम्मानित कलाकार गीतांजलि ने भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दधिकांधा के कार्यक्रम के बीच प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा भी मौजूद रहे।
जगह-जगह जुटे वायगीर
शेषनाग अवतार भगवान बलभद्र का जन्मोत्सव वायगीरों के लिए खास अवसर होता है, पानीगांव, अकोश आदि गांवों में वायगीरों के मेला में काल सर्प दोष के निवारण के लिए अनुष्ठा किये गये । इसके अलावा विषवेल, कुंठवेल, सर्प दंश के इलाज किये गये।













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