देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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नई दिल्ली। कांस्य पदक विजेता महिला पहलवान दिव्या काकरान ने केजरीवाल सरकार से पर्याप्त सुविधा नहीं मिलने पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी सुविधा पहले मुहैया करवा देते तो मैं कांस्य नहीं, स्वर्ण पदक लेकर आती। काकरान ने खिलाडियों के सम्मान समारोह दौरान कहा कि जब वे एशियन चैंपियनशिप से वापस लौटीं थी तो सरकार से पत्र लिखकर मदद करने की गुहार लगाई थी, लेकिन उन्हें किसी भी तरह की सहायता नहीं दी। उन्होंने कहा कि मेरे कोच ने अपनी नौकरी छोडक़र स्वयं के पैसों से उनके लिए बादाम की व्यवस्था करवाई।
उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसे सम्मान का क्या फायदा. खिलाडिय़ों को मदद की आवश्यकता पदक जीतने के बाद नहीं, बल्कि पहले होनी चाहिए थी। इससे बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार जल्द ही खिलाडिय़ों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए जल्द ही दो नीतियां तैयार करेंगी। इन दो नीतियों के तहत सरकार पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों और शुरुआती दिनों में युवा प्रतिभा के रूप में पहचाने जाने वाले खिलाडिय़ों को वित्तीय सहायता देगी। केजरीवाल ने इन नीतियों की घोषणा जकार्ता में आयोजित एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले 11 खिलाडिय़ों को राजधानी दिल्ली में सम्मानित करने के दौरान की। आप सभी ने अपने परिवार के साथ-साथ इस देश और दिल्ली को गैरवांन्वित किया है। आप में से कई खिलाड़ी कठिन परिस्थितियों से जूझ चुके हैं। आपने वित्तीय समस्याओं और सुविधाओं की कमी का सामना किया है। आपका प्रयास अतुलनीय है।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेताओं को दिए जाने वाले नकद पुरस्कार में इजाफा किया है। ऐसे में दिल्ली सरकार एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाले खिलाडिय़ों को एक करोड़ रुपए देगी। इसके अलावा, रजत पदक विजेताओं को 75 लाख रुपए, तथा कांस्य पदक विजेताओं को 50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। इससे पहले स्वर्ण पदक वालों को 20 लाख रुपए, रजत पदक विजेताओं को 14 लाख रुपए और कांस्य पदक विजेताओं को 10 लाख रुपए दिए जाते थे।
साभार-khaskhabar.com













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