देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा(सुनील शर्मा)। लाला, कन्हैया, कान्हा, छलिया, रणछोर, श्रीकृष्ण यशोदानंदन को आज संपूर्ण ब्रह्माड नमन कर योगेश्वर का यशोगान कर रहा है। राधाजी के प्राण प्रिये पर बलिहारी ब्रज में सोमवार को पूरी दुनिया देवकीनंदन के संमुख नतमस्तक होने के लिए आ चुकी है। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक कृष्णवंदे जगद्गुरु की जय-जयकार हो रही है। हिंद के कोने-कोने से राधाकृष्ण के लाखों भक्त उनकी लीला भूमि की रज अपने माथे से लगाकर धन्य हो रहे हैं। सात समंदर पार के हजारों भक्त इस्कॉन मंदिर में राधाकृष्ण की मनोहरी छवि को टकटकी लगाकर निहार रहे हैं। वृंदावन के राधाकृष्ण मंदिर में लाला के जन्म को अभिषेक हो गया है। आधीरात को कंस के कारागर में वसुदेव सुत के अवतरित की लीला के साक्षत् दर्शन होंगे। इस क्षण को आत्मिक आनंद लेने के लिए लाखों लोग सड़कों पर ही अपना बिछौना डाले हुए हैं। मधुपुरी मथुरा के गली-गलियारों में अल्हड़ मस्ती छायी हुई है। न किसी को भूख सता रही है और न यहा पर आज कोई भी प्यासा है। मथुरावासी आज अतिथि देवो: भव: के भाव से विभोर होकर कन्हैया के भक्तों का स्वागत-सत्कार कर रहे हैं। भोग-प्रसाद के लिए कदम-कदम पर भंडारे चल रहे हैं और श्रद्धालु छक कर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। मनभावन गीत-संगीत के फूटते सुर हृदय में आध्यात्मिक सागर को हिलोर मारने को मजबूर कर रहे हैं। यही तो परिदृश्य आकर्षण का केंद्र बनकर उभर रहा है। घर-घर हरिभजन हो रहे हैं। लल्ला को अर्पित करने के लिए भोग प्रसाद बन रहा है। अनगिनत नर-नारी उपवास रख रहे हैं। फलहार लिया जा रहा है।













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