देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा(केके पाठक)। भारत वर्ष में श्रीकृष्ण जन्माष्टी बड़ी धूमधाम के साथ मनाई गई। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जनपद में जन्मभूमि ही नहीं पूरे जनपद के मंदिर में कृष्ण की नगरी कृष्णमय दिखाई दी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आज आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देश विदेश से भगवान श्रीकृष्ण के रूप को देखने के लिए लाखों लोग अपने लल्ला के जन्मोत्सव अवसर पर यहां पहुंच गए। रात्रि 12 बजे जैसे ही कान्हा ने जन्म लिया वैसे ही मंदिरों में ढोल, नगाड़े, मृदंग व कान्हा के जयकारों से आसमान गूंज उठा। प्रशासन ने इसके लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी और उसी का नतीजा रहा कि कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।
जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए बृज को अनोखे रूप से सजाया गया था। सुबह से ही जन्म उत्सब को लेकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर कार्यक्रम शुरू हो गए। लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने लल्ला के जन्मोत्सव मनाने यहां पहुंचे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार लगभग 5 लाख से ज्यादा लोग जन्माष्टमी पर यहां आए। प्रशासन ने भी भक्तों कि सुरक्षा को लेकर काफी इंतजाम किए थे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के आस-पास दो पहिया वाहनों को बंद कर दिया गया था। हर पॉइंट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। खुफिया एजेंसियों व सिविल ड्रेस में भी काफी संख्या में पुलिस कर्मी संदिग्धों पर नजरें गड़ाए हुए थे। शहर के हर रास्ते पर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें नजर आ रही थी। जहां देखो राधे-राधे नाम के जयकारे गूंज रहे थे।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सुबह सात बजे रासलीला का भव्य आयोजन हुआ। उसके बाद गुरू शरणानंदजी द्वारा पुष्प अर्पित किए। सायं 5 बजे भरतपुरगेट से श्रीकृष्ण जन्मस्थान तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सात बजे श्रीकृष्ण जन्मलीला का आयोजन व 11 बजे श्रीगणेश नवग्रह पूजन किया गया। जैसे ही 12 बजे श्रीकृष्ण के जयकारों से आसमान गुंजायमान हो उठा और उन्होंने श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। इसी दौरान महाआरती की गई।













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